देशभर की आम जनता को सोमवार सुबह एक और महंगाई का झटका लगा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। इस बार पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है।
लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों से आम लोगों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसका सीधा असर घरेलू बजट, परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ने वाला है।
पहले भी बढ़ चुके हैं 3 रुपये प्रति लीटर
गौरतलब है कि इससे पहले 15 मई को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। यानी बीते केवल पांच दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल के दाम कुल 3.90 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने वाहन चालकों, व्यापारियों और मध्यम वर्ग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बड़े शहरों में बढ़ीं नई कीमतें
नई कीमतें लागू होने के बाद देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम नए स्तर पर पहुंच गए हैं। राजधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत कई शहरों में लोगों को अब पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
खासतौर पर रोजाना वाहन का इस्तेमाल करने वाले लोग इस बढ़ोतरी से सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का पड़ रहा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और वैश्विक परिस्थितियां ईंधन कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।
पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
परिवहन और रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी
ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे बाजार पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, सब्जियों, फल, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रांसपोर्ट कारोबार पर बढ़ा दबाव
ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती डीजल कीमतों से माल ढुलाई महंगी हो रही है। ट्रक और बस संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
यदि यही स्थिति जारी रही तो परिवहन किराए में भी बढ़ोतरी की जा सकती है। वहीं टैक्सी, ऑटो और कैब चालकों ने भी ईंधन कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि पर चिंता जताई है।
आम जनता ने मांगी राहत
आम लोगों का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी परेशानी लेकर आई है। रसोई का बजट, बच्चों की पढ़ाई, यात्रा और अन्य खर्च पहले ही बढ़ चुके हैं, ऐसे में ईंधन के दाम बढ़ने से आर्थिक दबाव और अधिक महसूस होगा।
कई लोगों ने सरकार से ईंधन पर टैक्स कम करने और राहत देने की मांग की है।
तेल कंपनियों ने क्या कहा
हालांकि तेल कंपनियों का कहना है कि कीमतों का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। कंपनियां वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए रोजाना कीमतों की समीक्षा करती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आती है तो आने वाले दिनों में भी ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
फिलहाल राहत की उम्मीद कम
लगातार दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी ने साफ कर दिया है कि फिलहाल आम जनता को राहत मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं।
ऐसे में बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों का असर आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब दोनों पर देखने को मिल सकता है।








