उत्तर प्रदेश के में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन इन दिनों बदहाल सड़कों की वजह से गंभीर संकट का सामना कर रहा है।
शहर में पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-बस सेवा अब जर्जर मार्गों पर किसी परीक्षा से कम नहीं रह गई है। हालात ऐसे हैं कि बस चालक, कर्मचारी और यात्री रोजाना खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं।
पुल निर्माण के चलते बदला गया मार्ग
दरअसल ककरा से बरेली मोड़ और रोडवेज की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित पुल को ऊंचा करने का कार्य चल रहा है।
प्रशासन की ओर से यह कार्य शहर को संभावित बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए कराया जा रहा है। पुल पर निर्माण कार्य जारी होने के कारण ई-बसों को फिलहाल वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा रहा है।
यह मार्ग ककरा रेलवे लाइन होते हुए पावर हाउस रोड से होकर गुजरता है, लेकिन इसकी हालत बेहद खराब हो चुकी है।
गड्ढों और मलबे से बढ़ा हादसे का खतरा
सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है और निर्माण सामग्री तथा मलबा भी रास्ते में फैला पड़ा है।
ऐसे में भारी ई-बसों को निकालना चालक के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बसों को धीमी गति से चलाना पड़ रहा है, जिससे यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश होने की स्थिति में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है।
तकनीकी खराबियों का बढ़ा खतरा
ई-बस कर्मचारियों का कहना है कि लगातार खराब सड़कों पर संचालन होने से वाहनों में तकनीकी खराबियों की संभावना बढ़ गई है।
इलेक्ट्रिक बसें सामान्य डीजल बसों की तुलना में अधिक संवेदनशील मानी जाती हैं। झटकों और खराब रास्तों का असर सीधे उनके सस्पेंशन, बैटरी सिस्टम और अन्य तकनीकी हिस्सों पर पड़ सकता है।
यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो कई बसें संचालन से बाहर भी हो सकती हैं।
प्रशासन को भेजे जा चुके हैं पत्र
सूत्रों के मुताबिक सिटी बस संचालन प्रबंधन की ओर से पहले भी प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजकर सड़क की तत्काल मरम्मत और बेहतर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की जा चुकी है।
इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।
उनका कहना है कि एक ओर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर उनके संचालन के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।
आम लोगों को भी हो रही परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति का असर सिर्फ ई-बसों पर ही नहीं बल्कि आम यातायात पर भी पड़ रहा है।
रोजाना लोग जाम, धूल और दुर्घटना के खतरे से जूझ रहे हैं। कई बार छोटे वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे लंबा जाम लग जाता है।
यात्रियों का कहना है कि ई-बसें शहर के लिए आधुनिक और सुविधाजनक सेवा हैं, लेकिन खराब सड़कों के कारण सफर असहज और जोखिम भरा बन गया है।
विशेषज्ञों ने बताई बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहरों में इलेक्ट्रिक परिवहन व्यवस्था को सफल बनाना है तो केवल वाहन खरीदना पर्याप्त नहीं होगा।
उनके लिए बेहतर सड़कें, सुचारु यातायात और मजबूत आधारभूत ढांचा भी जरूरी है।
में मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि योजनाओं को जमीन पर सफल बनाने के लिए प्रशासन को तेजी से काम करना होगा।
लोगों को सड़क मरम्मत का इंतजार
फिलहाल शहरवासियों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं।
लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही सड़क की मरम्मत कराकर ई-बसों के लिए सुरक्षित और सुगम मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि पर्यावरण के अनुकूल यह सेवा बिना किसी बाधा के जारी रह सके।






