पश्चिम बंगाल के चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड मामले में शक के आधार पर गिरफ्तार किए गए राज सिंह को आखिरकार राहत मिल गई है। कोलकाता की अदालत से जमानत मिलने के बाद गुरुवार को राज सिंह मीडिया के सामने आए और अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने दावा किया कि यदि मामले की जांच यानी CBI को नहीं सौंपी जाती, तो उनका कभी भी एनकाउंटर किया जा सकता था।
राज सिंह के इस बयान के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और जांच प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
“हर समय डर लगा रहता था”: राज सिंह
राज सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि गिरफ्तारी के बाद उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह घबरा गए थे और उन्हें हर समय डर लगा रहता था कि कहीं उन्हें फर्जी मुठभेड़ में मार न दिया जाए।
उन्होंने कहा:
“अगर CBI जांच नहीं होती और परिवार सबूत पेश नहीं करता, तो शायद मैं आज जिंदा नहीं होता।”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि परिवार द्वारा पेश किए गए मजबूत सबूत और सच्चाई के कारण उन्हें न्याय मिला और वह आज अपने परिवार के बीच वापस लौट सके हैं।
घटना वाले दिन बलिया में होने का दावा सही निकला
राज सिंह ने बताया कि घटना वाले दिन वह पश्चिम बंगाल में नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मौजूद थे।
परिवार ने जांच एजेंसियों और अदालत के सामने:
- सीसीटीवी फुटेज
- डिजिटल रिकॉर्ड
- दस्तावेजी सबूत
पेश किए, जो जांच में सही पाए गए।
कोलकाता की अदालत ने भी माना कि घटना के दिन राज सिंह बलिया में ही मौजूद थे। इसके बाद उन्हें जमानत मिल गई।
भावुक हुआ परिवार, मां से लगकर सुनाई पूरी कहानी
रिहाई के बाद राज सिंह घर पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मां जामवंती को गले लगाकर पूरी घटना सुनाई। परिवार ने इसे “सच्चाई और न्याय की जीत” बताया।
राज की बहन दीपशिखा ने कहा कि परिवार शुरू से ही उनकी बेगुनाही का दावा कर रहा था और लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहा था।
संगठन से नाराज राज सिंह
राज सिंह ने कहा कि वह अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, पूर्वांचल प्रांत के प्रदेश सचिव हैं, लेकिन मुश्किल समय में संगठन ने उनका साथ नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि:
- किसी ने उनकी मदद नहीं की
- मुश्किल समय में परिवार अकेला लड़ता रहा
- अब वह संगठन से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं
कैसे हुई थी गिरफ्तारी?
गौरतलब है कि चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में:
- 10 मई को बिहार के बक्सर से मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य गिरफ्तार किए गए थे
- मयंक से मिले इनपुट के आधार पर 11 मई को राज सिंह को गिरफ्तार किया गया
- 18 मई को बलिया निवासी राजकुमार सिंह को मुजफ्फरनगर से पकड़ा गया
जांच में सामने आया कि राजकुमार सिंह कई दस्तावेजों में अपने नाम के साथ “राज” भी लिखता था। इसके अलावा दोनों की दाढ़ी और चेहरे की बनावट में समानता होने के कारण एजेंसियों के बीच भ्रम की स्थिति बनी।
सोशल मीडिया पर भी दिया था संदेश
राज सिंह की बहन के अनुसार जमानत मिलने के बाद उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वह कहते नजर आए:
“जय श्रीराम, सबका जवाब मिल जाएगा, थोड़ा धैर्य बनाए रखिए।”
वीडियो में राज सिंह पूरी तरह आत्मविश्वास से भरे दिखाई दे रहे थे।
जांच एजेंसियों पर उठे सवाल
राज सिंह की रिहाई के बाद अब जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली, गलत पहचान और गिरफ्तारी को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि:
- केवल शक के आधार पर कार्रवाई से निर्दोष लोगों की जिंदगी प्रभावित हो सकती है
- जांच में तकनीकी और डिजिटल सत्यापन बेहद जरूरी है
- गलत गिरफ्तारी से न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है
फिलहाल परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने जांच प्रक्रिया और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।









