Ghaziabad में 12 मई की रात हुए पुलिस एनकाउंटर को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए समीर और जुबैर के परिजनों ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
परिवार की ओर से दायर याचिका में 16 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। अदालत ने याचिका स्वीकार कर मामले की अगली सुनवाई 30 मई को तय की है।
पुलिस ने क्या दावा किया था?
Ghaziabad Police के अनुसार 12 मई की रात समीर और जुबैर ATM कैश वैन लूटकांड में शामिल थे। पुलिस का दावा था कि दोनों आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल हो गए।


पुलिस के मुताबिक उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने एनकाउंटर को बताया फर्जी
मृतकों के परिजनों ने पुलिस की कहानी को पूरी तरह झूठा बताया है। परिवार का आरोप है कि समीर और जुबैर को पहले हिरासत में लिया गया था और बाद में सुनियोजित तरीके से एनकाउंटर दिखाकर मार दिया गया।
परिजनों ने अदालत से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
16 पुलिसकर्मियों के नाम शामिल
कोर्ट में दाखिल याचिका में क्राइम ब्रांच प्रभारी Anil Rajput समेत कुल 16 पुलिसकर्मियों के नाम शामिल किए गए हैं।
इनमें संदीप कुमार, विशाल राठी, मोहित शर्मा, आशीष सिंह, तरुण यादव, हिमांशु मलिक, फरमान, मानवेंद्र सिंह, प्रशांत मलिक, कपिल, आशीष, कुलदीप दीक्षित, मनोज कुमार, श्वेता सिंह और सचिन के नाम भी शामिल हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन सभी ने मिलकर फर्जी मुठभेड़ की कहानी तैयार की।
अनिल राजपूत पहले भी रह चुके हैं विवादों में
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा Anil Rajput को लेकर हो रही है। उनका नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है।
रिपोर्ट्स के अनुसार Noida में लॉ के एक छात्र को कथित तौर पर फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। इसके अलावा गाजियाबाद में एक आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को गनर उपलब्ध कराने के आरोपों को लेकर भी वे चर्चा में रहे थे।
पुलिस अपने एनकाउंटर को बता रही सही
दूसरी ओर पुलिस विभाग अब भी अपने एनकाउंटर को सही ठहरा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपी गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे और पुलिस टीम पर हमला करने के बाद जवाबी कार्रवाई में मारे गए।
हालांकि मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है, इसलिए आने वाले दिनों में यह केस और अधिक चर्चाओं में रह सकता है।
कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत द्वारा याचिका स्वीकार किया जाना महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अदालत प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच या आगे की कानूनी कार्रवाई के आदेश भी दिए जा सकते हैं।
अब सभी की नजरें 30 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में महत्वपूर्ण बहस होने की संभावना है।






