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एक नेता तय नहीं करेगा पत्रकारिता कौन करेगा — अपूर्वा चौधरी

BPC News National Desk
3 Min Read

पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर बढ़ते दबाव और हमलों के बीच एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट की अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी ने सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी नेता यह तय नहीं कर सकता कि पत्रकारिता कौन करेगा और कौन नहीं।

उन्होंने कहा:

“लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन सिस्टम से सवाल पूछने वाला हर व्यक्ति पत्रकार है।”

पत्रकारों के अधिकारों की लड़ाई का दावा

गाजियाबाद की निर्भीक पत्रकार के रूप में जानी जाने वाली अपूर्वा चौधरी दैनिक समाचार पत्र भारत का बदलता शासन की समाचार संपादक भी हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका संगठन किसी की चाटुकारिता नहीं करता, बल्कि पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए संघर्ष करता है।

उनके अनुसार:

  • कोई पत्रकार अकेला नहीं है

  • संगठन सभी पत्रकारों की मदद के लिए तैयार है

  • पत्रकारों पर झूठे आरोप बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे

हालिया घटनाओं के बीच आया बयान

यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में पत्रकारों को धमकाने और हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं।

हाल ही में संगठन ने पत्रकार आकाश गौड़ को कथित धमकी देने के मामले में सरकार से कार्रवाई की मांग की।

इस मामले में संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई अधिकारियों से मुलाकात की और प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरे का मुद्दा उठाया।

पत्रकारों को भी दी चेतावनी

अपूर्वा चौधरी ने पत्रकार समुदाय को भी सख्त संदेश दिया।

उन्होंने कहा:

“कोई पत्रकार ब्लैकमेल या अवैध उगाही नहीं करता। गलत काम बंद करो। पत्रकार सहयोग करेगा, लेकिन झूठे आरोप लगाए तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”

संगठन की भूमिका और सक्रियता

एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट पत्रकारों की सुरक्षा, कानूनी सहायता और नैतिक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय बताया जाता है।

अपूर्वा चौधरी पहले पुलिस के अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ आमरण अनशन भी कर चुकी हैं। उनकी सक्रियता के लिए उन्हें “अटल तिरंगा सम्मान-2025” से भी सम्मानित किया गया था।

देश में प्रेस फ्रीडम पर चिंता

देशभर में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। कई रिपोर्ट्स में पत्रकारों पर:

  • मुकदमे दर्ज होना

  • धमकियां मिलना

  • हमलों की घटनाएं

लगातार सामने आ रही हैं।

ऐसे माहौल में अपूर्वा चौधरी ने कहा:

“सवाल पूछना गुनाह नहीं, लोकतंत्र का मूल है। हम सच की आवाज हैं और दबाव में चुप नहीं बैठेंगे।”

निष्कर्ष

अपूर्वा चौधरी का यह संदेश खास तौर पर छोटे शहरों के पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका आह्वान है कि पत्रकार एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करें।

उन्होंने कहा:
“पत्रकारिता बचानी है तो लोकतंत्र बचाना होगा।”

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