AIMIM के प्रमुख नेता और विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने निजामाबाद में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए देश की एकता, समान अधिकार और धार्मिक सद्भाव पर जोर दिया। अपने भाषण में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत किसी एक वर्ग या समुदाय की जागीर नहीं, बल्कि यह सभी नागरिकों का साझा देश है।
“ना कुरान छोड़ेंगे, ना हिंदुस्तान” — ओवैसी का स्पष्ट संदेश
सभा को संबोधित करते हुए अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा,
“यह मुल्क किसी की जागीर नहीं है। यह मुल्क सबका है। इस मुल्क पर जितना हक तिलक लगाने वालों का है, उतना ही हक टोपी पहनने वालों का भी है। ना हम कुरान छोड़ेंगे और ना हम हिंदुस्तान छोड़ेंगे।”
उनके इस बयान को धार्मिक सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश माना जा रहा है।
बेरोजगारी और महंगाई को बताया देश का असली मुद्दा
ओवैसी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि देश की सबसे बड़ी चुनौतियां हिंदू-मुस्लिम मुद्दे नहीं, बल्कि
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बढ़ती बेरोजगारी
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बढ़ती महंगाई
हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इन समस्याओं से निपटने के लिए सभी समुदायों को मिलकर काम करना होगा और आपसी भाईचारे को मजबूत करना होगा।
संगठन मजबूत करने और चुनावी तैयारी का संकेत
यह जनसभा AIMIM की स्थानीय संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी तैयारियों के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। अकबरुद्दीन ओवैसी के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान को समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर लगातार मुखर
अकबरुद्दीन ओवैसी लंबे समय से तेलंगाना विधानसभा में AIMIM के फ्लोर लीडर के रूप में सक्रिय हैं। वे सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक अधिकारों और राष्ट्रीय मुद्दों पर लगातार अपनी राय रखते रहे हैं। निजामाबाद में दिया गया उनका यह ताजा बयान भी धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









