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अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत

BPC News National Desk
3 Min Read

मध्य पूर्व में सुरक्षा हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए हैं, क्योंकि अमेरिका ने पिछले 24 घंटों में अपनी सैन्य ताकत में भारी इजाफा कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 50 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही संवेदनशील वार्ताओं के बीच उठाया गया है, जो जेनेवा में अप्रत्यक्ष रूप से जारी हैं।

बड़े पैमाने पर फाइटर जेट्स की तैनाती

अमेरिकी सेना ने तेजी से कई आधुनिक लड़ाकू विमान क्षेत्र की ओर भेजे हैं। इनमें स्टेल्थ तकनीक से लैस एयर-सुपीरियरिटी और मल्टी-रोल फाइटर शामिल हैं।

सैन्य विश्लेषकों के अनुसार:

  • यह तैनाती अमेरिका की तेज प्रतिक्रिया क्षमता को दर्शाती है।

  • लंबे समय तक हवाई अभियान चलाने के लिए रिफ्यूलिंग टैंकर भी तैनात किए गए हैं।

  • यह सैन्य शक्ति प्रदर्शन क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

वार्ता और सैन्य दबाव — दोहरी रणनीति

यह सैन्य कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार:

  • तैनाती का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करना है।

  • यह कूटनीतिक वार्ता को समर्थन देने के साथ-साथ सैन्य विकल्प खुले रखने का संकेत भी है।

विशेषज्ञ इसे “carrot and stick strategy” यानी बातचीत और दबाव की संयुक्त नीति बता रहे हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया और बढ़ता क्षेत्रीय तनाव

ईरान ने इस सैन्य बिल्डअप को उकसावे वाला कदम बताया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने चेतावनी दी कि अमेरिका ईरान को कमजोर नहीं कर सकता।

इसके साथ ही:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान ने नौसैनिक अभ्यास बढ़ाए।

  • क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम और अतिरिक्त सैनिक तैनाती की खबरें भी सामने आई हैं।

वैश्विक सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह स्थिति

विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • परमाणु वार्ता की सफलता से क्षेत्र में स्थिरता आ सकती है।

  • विफलता की स्थिति में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है।

  • यह संकट वैश्विक ऊर्जा और सुरक्षा संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष

मध्य पूर्व में अमेरिका की तेज सैन्य तैनाती ने कूटनीतिक वार्ता के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। अब दुनिया की नजरें जेनेवा में जारी वार्ता के अगले चरण पर टिकी हैं।

यदि समाधान निकला तो क्षेत्र में शांति की संभावना बनेगी, लेकिन असफलता की स्थिति में बड़ा सैन्य संकट पैदा हो सकता है।

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