ईरान पर अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसी बीच पाकिस्तान में भड़के हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए अमेरिका ने बड़ा सुरक्षा कदम उठाया है। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने कराची और लाहौर स्थित अपने कॉन्सुलेट्स से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत पाकिस्तान छोड़ने का आदेश जारी किया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह फैसला बढ़ते सुरक्षा खतरों, हिंसक विरोध प्रदर्शनों और राजनयिक परिसरों पर संभावित हमलों की आशंका को देखते हुए लिया गया है। हालांकि इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास की स्थिति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर हिंसक प्रदर्शन
रिपोर्ट्स के अनुसार 1 मार्च को कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट जनरल के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। यह प्रदर्शन ईरान के समर्थन में और अमेरिका-इज़रायल के खिलाफ आयोजित किए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने “डेथ टू अमेरिका” और “डेथ टू इज़रायल” जैसे नारे लगाए और कॉन्सुलेट की सुरक्षा दीवार को तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।
रिपोर्ट्स के अनुसार इन झड़पों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी मरीन सिक्योरिटी गार्ड्स ने भी आत्मरक्षा में फायरिंग की, हालांकि मौतों का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
पूरे पाकिस्तान में फैल गया विरोध
कराची की घटना के बाद विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के अन्य शहरों तक भी फैल गए। लाहौर, इस्लामाबाद और कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन और झड़पों की खबरें सामने आईं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देशभर में हुई हिंसक घटनाओं में अब तक कुल 22 से 24 लोगों की मौत हो चुकी है। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी रही।
इन प्रदर्शनों का मुख्य कारण ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत बताई जा रही है, जिनकी कथित तौर पर अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त एयरस्ट्राइक में मृत्यु हो गई थी।
अमेरिकी मिशन का सुरक्षा अलर्ट
अमेरिकी मिशन टू पाकिस्तान ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए कराची और लाहौर कॉन्सुलेट्स से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत निकलने का निर्देश दिया गया है।
इसके साथ ही वीजा और अमेरिकी नागरिक सेवाओं से जुड़ी सभी नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं। कर्मचारियों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई है।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में आतंकवाद, अपहरण और राजनयिक परिसरों पर हमलों का खतरा बढ़ गया है।
अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ा तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा कर सकती है। कई विश्लेषकों का कहना है कि यह संकट 2011 में ओसामा बिन लादेन ऑपरेशन के बाद सबसे बड़ा कूटनीतिक तनाव बन सकता है।
पाकिस्तानी सरकार ने हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं और राजनयिक मिशनों की सुरक्षा बढ़ा दी है। हालांकि विरोध प्रदर्शनों के पूरी तरह शांत होने में अभी समय लग सकता है।
अमेरिकी नागरिकों के लिए चेतावनी
अमेरिकी दूतावास ने पाकिस्तान में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने और आधिकारिक ट्रैवल एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दक्षिण एशिया समेत कई देशों में सुरक्षा और राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है।







