उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 2022 में हुई इस सनसनीखेज हत्या को लेकर नए आरोप सामने आने के बाद राज्य भर में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और विपक्षी दल CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, पुलिस और सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी VIP की संलिप्तता नहीं पाई गई है।
क्या है पूरा मामला
19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं।
18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर शव चीला नहर में फेंक दिया गया था।
जांच में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के पुत्र) और उसके दो कर्मचारी सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता को दोषी पाया गया।
मई 2025 में कोटद्वार कोर्ट ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
नए विवाद की जड़
हाल ही में अभिनेत्री उर्मिला सनावर (पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी) ने सोशल मीडिया पर वीडियो और ऑडियो जारी किए।
इनमें दावा किया गया कि मामले में एक ‘VIP’ (गट्टू) शामिल था, जिसे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम बताया गया।
इन दावों के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है।
पुलिस और सरकार का पक्ष
उत्तराखंड पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जांच में किसी VIP की भूमिका नहीं मिली।
हरिद्वार ग्रामीण एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि चैट में उल्लिखित व्यक्ति धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान (नोएडा निवासी) था, जो अंकिता का परिचित बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, रिजॉर्ट रिकॉर्ड और गवाहों से भी VIP कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि यदि कोई विश्वसनीय सबूत सामने आता है, तो जांच कराई जाएगी।
विपक्ष का हमला और प्रदर्शन
कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल और अन्य संगठनों ने:
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देहरादून
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दिल्ली के जंतर-मंतर
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और अन्य स्थानों पर
प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने CBI जांच और कथित VIP का नाम उजागर करने की मांग की है।
कुछ संगठनों ने 11 जनवरी को बंद का भी ऐलान किया है।
कानूनी मोर्चे पर हलचल
भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने आरोपों को झूठा बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
उधर, उर्मिला सनावर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है। वे कुछ दिनों से नजरबंद बताई जा रही थीं, लेकिन हाल ही में उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी।
महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक संरक्षण और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्य में माहौल गरम है और आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
निगाहें जांच और सरकार के अगले कदम पर
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं।
परिवार और सामाजिक संगठनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके।










