ग्रेटर नोएडा के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) अब यात्री सेवाओं के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है। एयरपोर्ट अथॉरिटी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर, फ्यूल स्टेशन, पार्किंग और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का काम पूरा कर लिया गया है। अब केवल डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से एयरोड्रम लाइसेंस मिलना बाकी है, जिसके बाद कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू की जा सकेंगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में संकेत दिया था कि एयरपोर्ट फरवरी 2026 में उद्घाटन के लिए तैयार है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि लाइसेंस प्रक्रिया अंतिम चरण में है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसी महीने एयरपोर्ट के उद्घाटन की पूरी संभावना है। यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा और दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री दबाव को काफी हद तक कम करेगा।
इस बीच राज्य के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एक वीडियो साझा किया है। वीडियो में यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी, 3,900 मीटर लंबा रनवे, आधुनिक टर्मिनल बिल्डिंग, ATC टावर, विशाल पार्किंग एरिया और यात्री सुविधाओं की झलक देखने को मिलती है। यह वीडियो दर्शाता है कि एयरपोर्ट संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है।
हालांकि, एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर पहले भी कई बार तारीखें तय हुईं और बदली गईं। सुरक्षा मानकों और तकनीकी जांचों के चलते BCAS और DGCA से अंतिम स्वीकृति मिलने में देरी होती रही। सूत्रों के अनुसार, कैलिब्रेशन फ्लाइट्स और सेफ्टी ऑडिट जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं अब पूरी हो चुकी हैं और लाइसेंस किसी भी समय जारी किया जा सकता है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को PPP मॉडल पर विकसित किया गया है, जिसमें स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल की भागीदारी है। पहले चरण में यह एयरपोर्ट करीब 1.2 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष की क्षमता के साथ काम करेगा। शुरुआत में एक रनवे से परिचालन होगा, जबकि भविष्य में इसे छह रनवे तक विस्तारित करने की योजना है। एयरपोर्ट को नेट-जीरो एमिशन और डिजीयात्रा जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न केवल दिल्ली एयरपोर्ट का दबाव कम होगा, बल्कि रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। अब सभी की नजरें DGCA के एयरोड्रम लाइसेंस और आधिकारिक उद्घाटन तिथि की घोषणा पर टिकी हैं। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो फरवरी के अंत तक जेवर से पहली उड़ान भरती नजर आ सकती है।








