उत्तराखंड क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक मौका उस समय धूमिल पड़ गया, जब राज्य की टीम के रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल मुकाबले को देहरादून से बाहर शिफ्ट करने का फैसला लिया गया। उत्तराखंड ने इस सीजन पहली बार रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में जगह बनाई है, लेकिन घरेलू मैदान राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, देहरादून की खराब स्थिति के कारण यह मुकाबला यहां नहीं खेला जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के मुख्य पिच क्यूरेटर ने स्टेडियम का निरीक्षण करने के बाद यहां सेमीफाइनल आयोजित करने से साफ इनकार कर दिया है। निरीक्षण के दौरान पिच और आउटफील्ड की स्थिति को उच्च स्तरीय फर्स्ट-क्लास मैच के लिए अनुपयुक्त पाया गया।
स्टेडियम को लेकर पहले से ही कई रिपोर्ट्स में चिंता जताई जा चुकी थी। लंबे समय से रखरखाव की कमी, घास की अनियमित कटाई, आउटफील्ड में गड्ढे, ड्रेनेज सिस्टम की खराबी और पिच की असमान तैयारी जैसी समस्याएं सामने आई हैं। क्यूरेटर की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिच में असमान उछाल, नमी का असंतुलन और आउटफील्ड की खराब स्थिति खिलाड़ियों की सुरक्षा और मैच की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (UCA) के अधिकारियों ने इस फैसले पर निराशा जताई है। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि स्टेडियम को तैयार करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन मौसम और संसाधनों की कमी के कारण कुछ कमियां रह गईं। उन्होंने इसे उत्तराखंड क्रिकेट के लिए बड़ा झटका बताया।
बीसीसीआई अब सेमीफाइनल के लिए वैकल्पिक स्थानों पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मुकाबला उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख स्टेडियमों में से किसी एक में कराया जा सकता है। इनमें लखनऊ का भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी एकाना क्रिकेट स्टेडियम और कानपुर का ऐतिहासिक ग्रीन पार्क स्टेडियम शामिल हैं।
उत्तराखंड की टीम ने इस सीजन शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टरफाइनल में झारखंड को हराकर इतिहास रचा है। अब टीम को सेमीफाइनल बाहर के मैदान पर खेलना होगा, जो मानसिक और लॉजिस्टिकल रूप से चुनौतीपूर्ण रहेगा।
यह मामला उत्तराखंड क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। वर्ष 2018 में बनकर तैयार हुआ राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी कर चुका है, लेकिन हाल के वर्षों में रखरखाव की कमी के चलते यह विवादों में रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में भी बड़े मैचों की मेजबानी पर संकट बना रहेगा।








