उत्तराखंड की धार्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने एक अहम फैसला लिया है। समिति ने अपने अधीन आने वाले बदरीनाथ, केदारनाथ सहित कुल 46 मंदिरों में केवल हिंदू श्रद्धालुओं को ही प्रवेश देने का निर्णय किया है। गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध से जुड़ा यह प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में औपचारिक रूप से पारित किया जाएगा।
पवित्रता और परंपराओं की रक्षा बताया गया उद्देश्य
BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि समिति के अधीन सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय मंदिरों की पवित्रता, धार्मिक मर्यादा और सदियों पुरानी परंपराओं की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है।
“धाम पर्यटन स्थल नहीं, आस्था के केंद्र हैं” – BKTC अध्यक्ष
हेमंत द्विवेदी ने कहा कि
“बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे धाम पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं। यहां प्रवेश आस्था का विषय है, न कि नागरिक अधिकार का।”
उन्होंने यह भी कहा कि केदार खंड से मानस खंड तक फैली मंदिर परंपरा में ऐतिहासिक रूप से गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहा है।
संविधान के अनुच्छेद 26 का हवाला
मंदिर समिति ने अपने फैसले को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 से जोड़ा है, जो धार्मिक संस्थाओं को अपने आंतरिक मामलों के प्रबंधन और धार्मिक कार्यों को संचालित करने का अधिकार देता है। समिति का कहना है कि हाल के वर्षों में कुछ घटनाओं और परंपराओं के उल्लंघन के बाद इस नियम को औपचारिक रूप देना आवश्यक हो गया था।
चारधाम यात्रा से पहले आया फैसला
यह घोषणा आगामी चारधाम यात्रा सीजन से पहले सामने आई है।
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बदरीनाथ धाम 23 अप्रैल को शीतकालीन अवकाश के बाद खुलेगा
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केदारनाथ धाम की तिथि महाशिवरात्रि के अवसर पर घोषित की जाएगी
BKTC के अधीन आने वाले प्रमुख मंदिरों में पंच केदार, पंच बदरी, उखीमठ, कालीमठ, त्रियुगीनारायण, भविष्य बदरी और नरसिंह मंदिर शामिल हैं।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ विपक्षी दलों ने इसे विवादास्पद बताया है, जबकि समिति का कहना है कि यह देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम है।
मुख्यमंत्री का बयान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विषय पर कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत मंदिर समितियों की सिफारिशों के अनुसार कार्रवाई करेगी।
देवभूमि में पवित्रता का संदेश
BKTC का यह निर्णय देवभूमि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों की पवित्रता और परंपराओं को बनाए रखने की दिशा में एक मजबूत संदेश माना जा रहा है। समिति का दावा है कि इससे चारधाम यात्रा को और अधिक आध्यात्मिक और अनुशासित स्वरूप मिलेगा।









