गाजियाबाद, 09 दिसंबर। राजनगर एक्सटेंशन के आरडीसी क्षेत्र में अवैध गतिविधियों का मुद्दा फिर गरमाता दिख रहा है। शहर का यह सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित इलाका पिछले कई महीनों से कथित “बॉडी मसाज पार्लरों” के नाम पर चल रहे अवैध कार्यों के कारण विवादों में है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई पार्लर देह-व्यापार के अड्डों में बदल चुके हैं, जबकि पुलिस चौकी महज़ 100 मीटर और पुलिस मुख्यालय करीब 200 मीटर दूरी पर है।
कथित पार्लर कैसे चला रहे पूरा नेटवर्क?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन पार्लरों का संचालन पूरी तरह संगठित तरीके से हो रहा है—
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ऑफिस में बैठे दलाल ग्राहकों को “बॉडी मसाज” का लालच देते हैं।
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500–1000 रुपये एंट्री फीस ली जाती है।
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अंदर लड़कियों की लाइन-अप कराई जाती है, जहाँ चयन के लिए 500 से 5000 रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है।
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यह पूरा काम किराए के ऑफिस और व्यावसायिक दुकानों में चल रहा है।
लड़कियां गाजियाबाद, हापुड़, लोनी, दिल्ली-एनसीआर और अन्य शहरों से लाए जाने की बात भी सूत्रों ने बताई।
स्थानीय लोग डरे, पर खुलकर बोलने को नहीं तैयार
एक दुकानदार ने नाम न बताने की शर्त पर कहा—
“यहाँ पुलिस की गाड़ी रोज़ आती है, लेकिन पार्लर बंद होने की बजाय और बढ़ते जा रहे हैं… साफ है कि कोई बड़ी शह है।”
क्षेत्र में लगे CCTV कैमरों में अक्सर संदिग्ध गतिविधियाँ और देर रात आने-जाने वाले ग्राहक दिखाई देते हैं। महिलाओं और परिवारों ने भी असुरक्षा की भावना व्यक्त की है।
कठिन सवाल — कार्रवाई क्यों नहीं?
आरडीसी में यह नेटवर्क कोई नया नहीं है। शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई न होने से लोगों में निराशा है।
मुख्य सवाल यह उठ रहे हैं—
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पुलिस चौकी के ठीक पास यह नेटवर्क कैसे चल रहा है?
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लगातार शिकायतों के बाद भी छापे क्यों नहीं?
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क्या इन पार्लरों को किसी तरह का संरक्षण प्राप्त है?
स्थानीय महिला संगठनों ने भी इसे “परिवारों के लिए असुरक्षित माहौल” बताते हुए कड़े कदम उठाने की मांग की है।
आरडीसी की छवि को बड़ा खतरा
इमारतों, कार्यालयों और बाजारों से भरे इस प्रीमियम क्षेत्र की छवि इन अवैध गतिविधियों के कारण तेजी से गिर रही है।
निवासी चेतावनी दे रहे हैं कि—
“यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आरडीसी एनसीआर का बदनाम हब बन जाएगा।”
अब निगाहें गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट पर
लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पुलिस कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई करेंगे।
सवाल यही है—
पुलिस चौकी से 100 मीटर दूर चल रहे इस नेटवर्क को रोकने में आखिर बाधा क्या है?
इस मामले में शहर की जनता जवाब चाहती है, और समय ही बताएगा कि क्या इस अवैध गतिविधि पर कड़ी कार्रवाई होती है या नहीं।










