अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF 2026) के दौरान एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल “Board of Peace” की औपचारिक शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक संघर्षों के समाधान, युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।
शुरुआत में यह पहल गाजा युद्धविराम के बाद पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए प्रस्तावित की गई थी, लेकिन ट्रंप ने इसे भविष्य में यूक्रेन, मध्य पूर्व और अन्य संघर्ष क्षेत्रों तक विस्तारित करने की घोषणा की है।
Board of Peace क्या है?
Board of Peace को एक तेज़ कार्रवाई-उन्मुख वैश्विक मंच के रूप में पेश किया गया है, जो:
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संघर्ष क्षेत्रों में शांति स्थापना
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मानवीय सहायता
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पुनर्निर्माण परियोजनाएं
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अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग
जैसे मुद्दों पर काम करेगा।
ट्रंप ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पूरक मंच के रूप में बताया है, हालांकि कुछ विश्लेषक इसे यूएन के विकल्प के रूप में भी देख रहे हैं।
किन देशों ने किए साइन?
उद्घाटन समारोह में ट्रंप ने चार्टर पर हस्ताक्षर किए और उनके साथ लगभग 19–20 देशों के प्रतिनिधियों ने भी दस्तखत किए।
साइन करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं:
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पाकिस्तान
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सऊदी अरब
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तुर्की
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कतर
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
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जॉर्डन
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इंडोनेशिया
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हंगरी
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अजरबैजान
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बहरीन
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मोरक्को
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कजाकिस्तान
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कोसोवो
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अर्जेंटीना
कुछ रिपोर्टों के अनुसार 35 देशों ने इसमें रुचि दिखाई है, जबकि स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर योगदान की शर्त भी प्रस्तावित बताई जा रही है।
पाकिस्तान की भागीदारी क्यों अहम?
पाकिस्तान की ओर से इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मौजूद थे और उन्होंने चार्टर पर हस्ताक्षर किए।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम:
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गाजा मुद्दे पर मुस्लिम देशों की एकजुटता
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अमेरिका के साथ कूटनीतिक संबंध
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वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की भूमिका
को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान में घरेलू विवाद
हालांकि इस फैसले को लेकर पाकिस्तान में घरेलू स्तर पर तीखी बहस शुरू हो गई है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में:
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सरकार की अमेरिका-समर्थक नीति पर सवाल
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आर्थिक संकट के दौर में अमेरिका पर निर्भरता
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विदेश नीति की स्वतंत्रता को लेकर चिंता
जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान को पहले आंतरिक समस्याओं और आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए।
वैश्विक प्रतिक्रिया और आलोचना
यूरोप और कुछ अन्य देशों में इस पहल को लेकर आशंका जताई जा रही है कि:
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यह संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकती है
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अमेरिका वैश्विक नेतृत्व को नए तरीके से स्थापित करना चाहता है
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा:
“दुनिया आज पहले से ज्यादा सुरक्षित और समृद्ध है, और Board of Peace इस दिशा में एक नया कदम है।”
भारत की स्थिति क्या है?
भारत ने इस पहल के उद्घाटन समारोह में भाग नहीं लिया है।
अब तक भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सदस्यता पर बयान नहीं आया है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस पहल को:
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रणनीतिक रूप से देख रहा है
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क्षेत्रीय संतुलन के नजरिए से मूल्यांकन कर रहा है
क्या बदल सकती है वैश्विक राजनीति?
Board of Peace को ट्रंप की “America First” नीति का नया रूप माना जा रहा है, जिसमें अमेरिका:
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वैश्विक शांति प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका
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निर्णय लेने की तेज़ व्यवस्था
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फंडिंग आधारित सदस्यता मॉडल
को आगे बढ़ाना चाहता है।
पाकिस्तान की भागीदारी से दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भी संभावित बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है, खासकर भारत-पाक संबंधों के संदर्भ में।
निष्कर्ष
Board of Peace एक महत्वाकांक्षी वैश्विक पहल है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता निर्भर करेगी:
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सदस्य देशों की प्रतिबद्धता
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जमीनी स्तर पर परिणाम
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और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता पर
फिलहाल यह पहल वैश्विक कूटनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।








