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BPC न्यूज़ ब्यूरो – बधिर मरीजों को मिलेगी नई जिंदगी स्टेम सेल थेरेपी से – डॉ० बी०पी० त्यागी

BPC News National Desk
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BPC न्यूज़ ब्यूरो

BPC न्यूज़ ब्यूरो – बधिर मरीजों को मिलेगी नई जिंदगी स्टेम सेल थेरेपी से – डॉ बीपी त्यागी

 

ईएनटी अस्पताल, राज नगर आरडीसी गाजियाबाद में प्रेस वार्ता बधिरता के उपचार में स्टेम सेल्स चिकित्सा पद्धति के अभूतपूर्व योगदान एवं मरीजों के लिए वरदान पर आयोजित की गई। डॉ बीपी त्यागी के भारत के पहले डॉक्टर बन गए हैं जो स्टेस सेल्स से बधिर रोगियों का इलाज करेंगे।

 

अभी तक डॉक्टर बीपी त्यागी पीआरपी इंजेक्शन से बधिरता का इलाज करने वाले भारत के पहले डॉक्टर थे। आपको बता दें कि डॉ बीपी त्यागी 5 जुलाई को स्टेम सेल्स से बधिरता का इलाज का प्रशिक्षण लेने के लिए लंदन के प्रतिष्ठत कॉलेज गए थे। उनके साथ जूनियर डॉक्टर अर्जून भी उनके साथ लंदन गए और प्रशिक्षण प्राप्त किया।

 

दुर्भाग्यवश भारत में ये प्रकिया उपलब्ध कराने वाले अस्पताल या डॉक्टर ज्यादा नहीं हैं। स्टेम सेल को मदर सेल कहते हैं जो जन्म के बाद शिशु की नाभी से जुड़ी हुई नली के खून में पाए जाते हैं। लेकिन अभी तक स्टेम सेल्स चिकित्सा पद्धति सिर्फ कुछ चुनिंदा बीमारियों के लिए उपयोग की जा रही थी। ये स्टेम सेल अधिकांश वयस्क ऊतकों, जैसे अस्थि मज्जा या वसा में कम संख्या में पाए जाते हैं।

 

सबसे पहले आपको बताते हैं स्टेम सेल आखिर क्या होते हैं? स्टेम कोशिका या मूल कोशिका ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर के किसी भी अंग को विकसित करने की क्षमता होती है। इसके साथ ही ये शरीर की दूसरी कोशिका के रूप में भी ख़ुद को ढाल सकती हैं। इन कोशिकाओं को शरीर की किसी भी कोशिका की मरम्मत के लिए प्रयोग किया जा सकता है। कोशिकाओं की बीमारियों के इलाज के लिए इन्हें लैब में भी विकसित किया जा सकता है।

 

 

अभी दो तरह की स्टेम कोशिकाओं पर ही रिसर्च की जा रही है। एम्ब्रयोनिक या भ्रूण कोशिका और अडल्ट। भ्रूण स्टेम कोशिका उसी समय निकाल ली जाती है, जब बच्चा पेट में बन रहा होता है। लेकिन इसे अनैतिक माना जा रहा है। जबकि वयस्क स्टेम कोशिकाओं से ख़ास तरह की कोशिकाएं ही विकसित की जा सकती हैं और इनकी संख्या बहुत कम होती है।

 

स्टेम सेल प्राप्त करने के मुख्य तरीके हैं।

रक्त से – जहाँ एक विशेष मशीन का उपयोग करके रक्त से स्टेम सेल निकाले जाते हैं।

अस्थि मज्जा से – जहाँ कूल्हे की हड्डी से अस्थि मज्जा का एक नमूना निकालने की प्रक्रिया की जाती है।

स्टेम सेल थेरेपी से लाभ पाने वाले लोगों में ल्यूकेमिया, हॉजकिन रोग, नॉन-हॉजकिन लिंफोमा और कुछ ठोस ट्यूमर कैंसर वाले लोग शामिल हैं। स्टेम सेल थेरेपी से उन लोगों को भी लाभ हो सकता है जिन्हें अप्लास्टिक एनीमिया, प्रतिरक्षा संबंधी कमियाँ और चयापचय की वंशानुगत समस्याएँ हैं।

 

शोध के अनुसार, स्टेम सेल प्रत्यारोपण सफल साबित हुआ है, विभिन्न प्रकार के कैंसर, थैलेसीमिया और कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के इलाज में सफलता के साथ।

वर्तमान में, सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली स्टेम सेल थेरेपी हेमाटोपोइएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण (एचएससीटी) है, जिसका उपयोग ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसी स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है।

 

स्टेम सेल भविष्य में क्या ठीक कर सकते हैं?


टाइप 1 डायबिटीज, पार्किंसंस रोग, एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस, हृदय विफलता, ऑस्टियोआर्थराइटिस और अन्य स्थितियों के इलाज के लिए स्टेम कोशिकाओं का अध्ययन किया जा रहा है। स्टेम कोशिकाओं में प्रत्यारोपण और पुनर्याेजी चिकित्सा में उपयोग के लिए नए ऊतक बनने की क्षमता हो सकती है।

 

इसलिए बधिरता के अच्छे और कारगर इलाज के लिए स्टेम सेल का उपयोग मरीजों के लिए एक नई रोशनी, नया जीवन जैसा है। इससे अब ऐसे मरीजों को लाभ मिलेगा जिन्हें ये कह दिया गया कि उनकी बधिरता की बीमारी लाइलाज है। डॉ बीपी त्यागी बधिर मरीजों के लिए नई उम्मीद और भरोसा है। इस स्टेम सेल थेरेपी से इलाज करवाने के लिए कुछ लोगों ने अपना पंजीकरण करवाया है।

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