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ऑपरेशन TRASHI-I में उत्तराखंड का वीर सपूत शहीद: किश्तवाड़ मुठभेड़ में हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया ने दिया सर्वोच्च बलिदान

BPC News National Desk
4 Min Read

किश्तवाड़/बागेश्वर, 20 जनवरी 2026। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंहपुरा क्षेत्र में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन TRASHI-I के दौरान उत्तराखंड का एक और लाल देश के लिए शहीद हो गया। भारतीय सेना की 2 पैरा स्पेशल फोर्स (2 PARA SF) में तैनात हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया ने 18–19 जनवरी 2026 की रात भीषण मुठभेड़ में अदम्य साहस का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।

खुफिया सूचना के बाद चला ऑपरेशन TRASHI-I

सुरक्षा बलों को खुफिया इनपुट मिला था कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकवादी किश्तवाड़ के घने जंगलों और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में छिपे हुए हैं। इसके बाद सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन TRASHI-I शुरू किया।

मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों ने ऊंचाई का फायदा उठाते हुए सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड और भारी गोलीबारी की। इस हमले में कुल 8 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में शामिल हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की।

व्हाइट नाइट कोर ने दी श्रद्धांजलि

सेना की व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा—

“GOC, White Knight Corps और सभी रैंक्स हवलदार गजेंद्र सिंह को नमन करते हैं, जिन्होंने ऑपरेशन TRASHI-I के दौरान काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन में अद्भुत वीरता दिखाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।”

सेना ने बताया कि ऑपरेशन अभी भी जारी है। आतंकवादियों की तलाश के लिए ड्रोन, स्निफर डॉग्स और अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। आतंकियों के ठिकाने से मैगी, चावल और अन्य सामग्री बरामद हुई है, जिससे उनके लंबे समय तक छिपे रहने की योजना का पता चलता है।

कौन थे शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया?

शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया (43 वर्ष) उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र स्थित बीथी (पाण्याती) गांव के निवासी थे। वे स्वर्गीय धन सिंह गढ़िया के पुत्र थे और परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।

2 पैरा कमांडो यूनिट में उनकी गिनती एक निडर, अनुशासित और समर्पित सैनिक के रूप में होती थी। उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल यूनिट में दी जाती थी।

उनका पार्थिव शरीर 20 जनवरी 2026 को हेलीकॉप्टर से बागेश्वर लाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। गांव में मातम पसरा है और हर आंख नम है।

मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और संगठनों ने जताया शोक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया के बलिदान पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने एक वीर सपूत खो दिया है। उन्होंने शहीद के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा ABVP, BJP सहित कई सामाजिक संगठनों ने मौन रखकर वीर सपूत को नमन किया।

देश को हमेशा रहेगा गर्व

हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया की शहादत एक बार फिर यह याद दिलाती है कि देश की सुरक्षा के लिए हमारे जवान किस तरह हर पल जान जोखिम में डालते हैं। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। देश उनके साहस को हमेशा याद रखेगा और उनके परिवार को सलाम करता रहेगा।

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