राजस्थान के धौलपुर जिले के एक स्कूल के छात्र शैक्षिक भ्रमण पर उत्तराखंड के ऋषिकेश पहुंचे थे, लेकिन उनकी यात्रा सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी का उदाहरण बन गई।
32 स्लीपर सीट वाली बस में करीब 100 छात्र समेत कुल 120 लोग ठूंसकर लाए गए थे। यह बस राजस्थान से करीब 842 किलोमीटर का सफर तय कर ऋषिकेश पहुंची।
रास्ते में नहीं हुई कोई जांच
हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद बस को रास्ते में कहीं नहीं रोका गया।
किसी भी चेक पोस्ट या इंटरस्टेट जांच में बस की ओवरलोडिंग पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऋषिकेश पहुंचते ही एआरटीओ ने की कार्रवाई
आखिरकार ऋषिकेश में सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) की नजर बस पर पड़ी।
निरीक्षण के दौरान ओवरलोडिंग की पुष्टि होते ही:
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बस का चालान काटा गया
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भारी जुर्माना लगाया गया
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और बस को सीज कर दिया गया
छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि:
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ओवरलोडिंग से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है
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खासकर पहाड़ी और घुमावदार सड़कों पर यह और भी खतरनाक होता है
इतने छात्रों को एक बस में ठूंसकर लाना उनकी जान के साथ सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है।
चालक और मालिक पर सख्त कार्रवाई
एआरटीओ ने बस चालक और मालिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शैक्षिक भ्रमण के नाम पर नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
छात्रों को सुरक्षित वापस भेजा गया
कार्रवाई के बाद प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें अन्य सुरक्षित साधनों से वापस भेजने की व्यवस्था की।
अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को भी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया।
स्कूल प्रबंधन पर उठे सवाल
घटना के बाद अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है और इस तरह का जोखिम लेना अक्षम्य है।
अंतरराज्यीय जांच प्रणाली पर भी सवाल
यह मामला:
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परिवहन नियमों की अनदेखी
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और अंतरराज्यीय जांच प्रणाली की कमजोरी
को भी उजागर करता है।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते जांच होती, तो यह खतरा टल सकता था।
भविष्य के लिए सबक
अधिकारियों ने कहा कि:
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भविष्य में स्कूल यात्राओं की कड़ी निगरानी की जाएगी
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ओवरलोडिंग पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी
ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो।










