कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बीजिंग पहुंचे। यह दौरा कई वर्षों में किसी कनाडाई प्रधानमंत्री का चीन का पहला बड़ा आधिकारिक दौरा है—2017 के बाद पहली बार। पिछले साल मार्च में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह कार्नी की सबसे अहम विदेश यात्राओं में से एक मानी जा रही है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब कनाडा अमेरिका के साथ गंभीर व्यापारिक तनाव का सामना कर रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से दबाव में है। ट्रंप प्रशासन ने कनाडा पर भारी टैरिफ लगाए हैं, व्यापार वार्ताएं रद्द की हैं और यहां तक कि कनाडा की संप्रभुता पर भी सवाल उठाए हैं। ऐसे में कार्नी अमेरिका पर निर्भरता कम करने और गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करने की अपनी “बोल्ड” रणनीति के तहत चीन जैसे बड़े बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।
चीन का नजरिया: अमेरिका से दूरी की उम्मीद
चीन इस दौरे को कनाडा के साथ संबंध सुधारने का सुनहरा अवसर मान रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय और सरकारी मीडिया ने साफ संकेत दिया है कि यदि कनाडा अमेरिका की नीतियों का “आंख बंद करके पालन” करता रहा, तो द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार मुश्किल होगा।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कार्नी का यह दौरा “आठ सालों में पहला” है और बीजिंग इसे बेहद महत्व देता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी कार्नी से मुलाकात करेंगे। यह पिछले साल दक्षिण कोरिया में APEC साइडलाइन मीटिंग के बाद उनकी दूसरी मुलाकात होगी।
दौरे का एजेंडा क्या है?
मार्क कार्नी का यह दौरा 14 से 17 जनवरी तक चलेगा। इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी:
1. व्यापार और आर्थिक सहयोग
कनाडा चाहता है कि:
-
क्रूड ऑयल, कृषि उत्पाद और खनिज संसाधनों का निर्यात चीन को बढ़ाया जाए।
-
चीन कनाडा की ऊर्जा और संसाधन क्षमताओं में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है।
2. EV टैरिफ और जवाबी कदम
-
कनाडा ने हाल ही में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% टैरिफ लगाया था।
-
जवाब में चीन ने कनाडाई कृषि उत्पादों पर लेवी लगा दी।
-
दोनों पक्ष इस टकराव को सुलझाने के लिए बातचीत करना चाहते हैं।
3. अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य मुद्दे
-
ऊर्जा, कृषि, निवेश, सप्लाई चेन और वैश्विक सुरक्षा मसलों पर भी चर्चा होगी।
-
कार्नी चीनी प्रीमियर ली कियांग और नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के चेयरमैन झाओ लेजी से भी मुलाकात करेंगे।
पृष्ठभूमि: क्यों बिगड़े थे रिश्ते?
पिछले कुछ वर्षों में कनाडा-चीन संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं। इसके पीछे कई कारण रहे:
-
2018 में हुआवेई CFO मेन्ग वानझोउ की गिरफ्तारी
-
इसके बाद चीन द्वारा दो कनाडाई नागरिकों की हिरासत
-
हाल के वर्षों में EV टैरिफ विवाद
पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में रिश्ते और बिगड़े थे। अब मार्क कार्नी “प्रागमैटिक थॉ” की नीति अपनाकर इन्हें सुधारना चाहते हैं।
बैलेंसिंग एक्ट: अमेरिका बनाम चीन
हालांकि यह आसान नहीं होगा। कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार आज भी अमेरिका है। साथ ही सुरक्षा चिंताएं और ट्रंप की तथाकथित “डोनरो डॉक्ट्रिन” जैसी नीतियां भी कनाडा पर दबाव बनाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के साथ नजदीकी बढ़ाना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन रणनीतिक रूप से जोखिम भरा भी है। कार्नी को अमेरिका और चीन के बीच संतुलन साधना होगा।
निष्कर्ष: मौका भी, चुनौती भी
मार्क कार्नी का यह दौरा कनाडा की ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन रणनीति का अहम हिस्सा है। जहां वह अमेरिका की अनिश्चितता से बचने के लिए नए साझेदार तलाश रहे हैं, वहीं चीन इसे कनाडा को अमेरिकी प्रभाव से दूर करने का अवसर मान रहा है।
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि:
-
क्या यह दौरा ठोस व्यापारिक सौदों और रिश्तों में असली ब्रेकथ्रू लाता है,
-
या फिर यह सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित रह जाता है।
फिलहाल दोनों पक्षों में उम्मीदें ऊंची हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं।










