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46 सेकंड में 40 देशों के ध्वज पहचानकर क्रिसिव राय ने रचा इतिहास, वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम

BPC News National Desk
3 Min Read

प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती—इस कथन को सच कर दिखाया है मात्र चार वर्षीय क्रिसिव राय ने। अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति और असाधारण एकाग्रता के बल पर क्रिसिव ने 46 सेकंड में 40 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों की सटीक पहचान कर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया है। इस उपलब्धि को वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है।

असाधारण स्मरण शक्ति ने दिलाया वैश्विक सम्मान

इतनी कम उम्र में इतनी तेज़ पहचान क्षमता और एकाग्रता दुर्लभ मानी जाती है। क्रिसिव की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र और देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।

वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने किया सम्मानित

वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने क्रिसिव राय की असाधारण प्रतिभा को मान्यता देते हुए उन्हें रिकॉर्ड होल्डर घोषित किया है। इस सम्मान के साथ ही क्रिसिव का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर दर्ज हो गया है।

चार वर्षीय क्रिसिव राय ने 46 सेकंड में 40 देशों के राष्ट्रीय ध्वज पहचानकर वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया।

माता-पिता ने जताया गर्व और खुशी

क्रिसिव की माता ऋतु राय और पिता परीक्षित अंकुर ने इस उपलब्धि पर हर्ष और गर्व व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि क्रिसिव शुरू से ही जिज्ञासु स्वभाव का रहा है और नई-नई जानकारियाँ सीखने में उसकी विशेष रुचि रही है।

निरंतर अभ्यास और सकारात्मक माहौल का परिणाम

परिवार के अनुसार, नियमित अभ्यास, सकारात्मक वातावरण और निरंतर प्रोत्साहन ने क्रिसिव की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। घर में पढ़ाई और खेल दोनों को संतुलित रूप से प्रोत्साहित किया जाता है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी शुरू

परिवार ने बताया कि आने वाले समय में क्रिसिव को अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयार किया जा रहा है, ताकि वह भविष्य में भी देश का नाम रोशन कर सके।

बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनी यह उपलब्धि

क्रिसिव राय की यह सफलता यह संदेश देती है कि यदि बच्चों को सही दिशा, प्रोत्साहन और अवसर दिए जाएं, तो वे बहुत कम उम्र में भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

देश के लिए गर्व का क्षण

चार साल की उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर क्रिसिव ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा को उम्र की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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