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प्रयागराज माघ मेला 2026 में विवाद, शंकराचार्य और प्रशासन आमने-सामने

BPC News National Desk
4 Min Read

हिंदू आस्था के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल प्रयागराज माघ मेला 2026 इस बार धार्मिक और प्रशासनिक विवाद के कारण चर्चा में आ गया है। मौनी अमावस्या (19 जनवरी) के महास्नान के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके अनुयायियों के साथ पुलिस-प्रशासन के बीच हुई झड़प ने पूरे मामले को तूल दे दिया है।

इस घटना के बाद संत समाज, प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

शंकराचार्य का आरोप: संगम जाने से रोका गया

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि:

  • पुलिस ने उन्हें संगम नोज तक जाने से रोका

  • उनके शिष्यों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया

  • छाता तोड़ा गया और धक्का-मुक्की हुई

इन आरोपों के विरोध में शंकराचार्य ने मेला क्षेत्र में धरना दिया, भोजन-पानी त्याग दिया और प्रशासन से माफी की मांग की।

मेला प्रशासन का पक्ष: नियमों का उल्लंघन

मेला प्रशासन ने इस मामले में शंकराचार्य को नोटिस जारी किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि:

  • बैरियर तोड़े गए

  • अव्यवस्था फैलाई गई

  • VIP प्रतिबंध के बावजूद नियम तोड़े गए

प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या पर VIP स्नान प्रतिबंधित था और सुरक्षा कारणों से यह निर्णय लिया गया था। पूरे घटनाक्रम के CCTV फुटेज उपलब्ध होने का दावा भी किया गया है।

दूसरा नोटिस जारी करते हुए प्रशासन ने 48 घंटे में जवाब न देने पर मेला क्षेत्र से प्रतिबंध की चेतावनी दी है।

राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के नोटिस को अपमानजनक बताते हुए 8 पन्नों का कानूनी जवाब भेजा है और नोटिस वापस लेने की मांग की है। साथ ही उन्होंने मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी है।

मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है, जहां प्रशासनिक कार्रवाई की जांच की मांग की गई है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

इस विवाद पर राजनीति भी शुरू हो गई है।

अखिलेश यादव (सपा प्रमुख)

उन्होंने इसे:

  • “संतों का अपमान”

  • “प्रशासनिक मनमानी”
    बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य

उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहराया और कहा कि:

“नियम सभी के लिए समान हैं।”

कांग्रेस

कांग्रेस ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

माघ मेला 2026: सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रशासन के अनुसार, माघ मेला 2026 में:

  • पिछले साल से 20% ज्यादा पुलिस बल

  • AI आधारित CCTV निगरानी

  • ड्रोन सर्विलांस

  • फायर ब्रिगेड मॉक ड्रिल

  • मेडिकल इमरजेंसी टीम

जैसे अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं ताकि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

नियम बनाम सम्मान की बहस

यह मामला अब एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है:

  • क्या प्रशासन नियमों के नाम पर संतों के साथ कठोर व्यवहार कर रहा है?

  • या फिर धार्मिक नेताओं को भी प्रशासनिक व्यवस्था का पालन करना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि माघ मेला जैसे आयोजनों में:

सुरक्षा, नियम और अनुशासन जरूरी हैं, लेकिन संवाद और संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

सरकार की छवि पर असर?

हालांकि प्रशासन इसे नियमों का पालन बता रहा है, लेकिन इस विवाद ने उत्तर प्रदेश सरकार के सामने एक चुनौती खड़ी कर दी है।

एक छोटी घटना भी:

  • सोशल मीडिया

  • धार्मिक संगठनों

  • राजनीतिक मंचों

पर सरकार की छवि को प्रभावित कर सकती है, खासकर ऐसे आयोजन में जहां करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

निष्कर्ष

माघ मेला आस्था का पर्व है, विवाद का नहीं।
जरूरत है कि:

  • प्रशासन संवाद और संतुलन बनाए

  • धार्मिक नेता नियमों का सम्मान करें

  • दोनों पक्ष संयम बरतें

ताकि माघ मेला श्रद्धा, शांति और व्यवस्था का प्रतीक बना रहे।

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