नई दिल्ली में संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण इस बार राजनीतिक रूप से बेहद अहम रहने वाला है, क्योंकि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 9 मार्च 2026 को चर्चा और मतदान के लिए तय किया गया है। यह जानकारी केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने दी।
उन्होंने बताया कि बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिल भी शामिल है।
विपक्ष के आरोप क्या हैं
विपक्ष ने 10 फरवरी को 118 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ यह प्रस्ताव पेश किया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करते हैं और विपक्षी नेताओं को बोलने का पर्याप्त समय नहीं देते।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, वाम दल, आरजेडी, शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी सहित कई दल इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं।
सरकार की चेतावनी और रणनीति
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नियमों के अनुसार प्रस्ताव को सत्र के पहले दिन लिया जाएगा और बहस के बाद मतदान होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि विपक्ष लगातार बाधा डालता रहा तो सरकार गुिलोटिन प्रक्रिया का सहारा ले सकती है।
ऐतिहासिक संदर्भ
स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह चौथी बार है जब लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। पहला मामला 1954 में सामने आया था, जब पहले स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव पेश हुआ था।
बजट सत्र क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा
सरकार ने संकेत दिए हैं कि आगामी सत्र में आर्थिक सुधारों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जा सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा भी होगी।
राजनीतिक असर और संभावनाएं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव विपक्ष की एकजुटता की परीक्षा होगा। हालांकि लोकसभा में बहुमत होने के कारण सरकार की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
फिर भी 9 मार्च को संसद में तीखी बहस होने की संभावना है, जिसका देश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।








