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देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग के नए चीफ का ऐलान, रंजन कुमार मिश्र बने PCCF

BPC News National Desk
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उत्तराखंड सरकार ने वन विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए 1993 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी रंजन कुमार मिश्र को प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (PCCF) एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) का दायित्व सौंपा है।

यह नियुक्ति वरिष्ठ IFS अधिकारी समीर सिन्हा के सेवानिवृत्ति के बाद की गई है, जिन्होंने लंबे समय तक विभाग का नेतृत्व किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन में नई ऊर्जा की उम्मीद की जा रही है। रंजन कुमार मिश्र, जो पहले चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन के रूप में सेवा दे चुके हैं, अब राज्य के समृद्ध वन संसाधनों और जैव विविधता की रक्षा की कमान संभालेंगे।

समीर सिन्हा का रिटायरमेंट: एक युग का अंत

समीर सिन्हा, जो 1992 बैच के IFS अधिकारी हैं, ने वन विभाग में अपनी सेवाओं से कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। उनके कार्यकाल में उत्तराखंड के संरक्षित क्षेत्रों में वन कवर बढ़ाने, जंगलों की आग से बचाव और वन्यजीव तस्करी पर अंकुश लगाने जैसे कदम उठाए गए।

सेवानिवृत्ति के बाद वे सलाहकार भूमिका में रह सकते हैं। सिन्हा ने कहा, “यह मेरे लिए गर्व का विषय रहा है कि उत्तराखंड के हरे-भरे जंगलों को मजबूत करने में योगदान दिया। नए चीफ को शुभकामनाएं।”

रंजन कुमार मिश्र: अनुभवी पर्यावरण योद्धा

1993 बैच के IFS अधिकारी रंजन कुमार मिश्र उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठतम अधिकारियों में शुमार हैं। उन्होंने विभिन्न जिलों में कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, चीफ कंजर्वेटर और हाल ही में CAMPA (कॉम्पेंसेटरी एफॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी) के सीईओ के रूप में कार्य किया है।

मिश्र को वन संरक्षण नोडल ऑफिसर के अतिरिक्त दायित्व से भी नवीनतम फेरबदल में राहत मिली थी, लेकिन अब उन्हें विभाग का सर्वोच्च पद सौंपा गया है।

उनके नेतृत्व में फोकस रहेगा:

वन्यजीव संरक्षण: टाइगर रिजर्व और बायोस्फीयर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा।

जलवायु परिवर्तन से निपटना: वन आग, बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से जंगलों को बचाने के लिए नई रणनीतियां।

सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों को वन संरक्षण में जोड़ना और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना।

मिश्र ने नियुक्ति स्वीकार करते हुए कहा, “उत्तराखंड के वन भारत की जैव विविधता का खजाना हैं। मैं समीर सिन्हा सर के योगदान को आगे बढ़ाते हुए सतत विकास पर जोर दूंगा।”

विभाग में व्यापक फेरबदल

इस नियुक्ति के साथ वन विभाग में 35 से अधिक IFS अधिकारियों का स्थानांतरण भी किया गया है। प्रमुख बदलावों में एसपी सुबुद्धि को PCCF (फॉरेस्ट कंजर्वेशन) का अतिरिक्त दायित्व, नितीश मणि त्रिपाठी को चीफ कंजर्वेटर साउथ सर्कल और संजीव चतुर्वेदी को फॉरेस्ट्री ट्रेनिंग अकादमी का डायरेक्टर बनाया गया।

ये बदलाव विभाग की दक्षता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से किए गए हैं।

यह फेरबदल उत्तराखंड के पर्यावरणीय चुनौतियों – जैसे हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते खतरे – को देखते हुए समयबद्ध है। राज्य सरकार ने वन कवर को 45% से ऊपर ले जाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें नए PCCF की भूमिका अहम होगी।

वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मिश्र के नेतृत्व में राज्य के संरक्षित जंगलों को नई दिशा मिलेगी, जो न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

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