संविधान दिवस से ठीक पहले देश में संविधान की रक्षा को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दलित, ओबीसी, माइनॉरिटी और आदिवासी संगठनों के परिसंघ (डोमा परिसंघ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने प्रेस कांफ्रेंस कर दिल्ली पुलिस द्वारा उनकी प्रस्तावित रैली की अनुमति (NOC) न दिए जाने पर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

डॉ. उदित राज ने बताया कि 30 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में “संविधान और वोट बचाओ” विशाल रैली का आयोजन प्रस्तावित था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।
उन्होंने आरोप लगाया:
“एक तरफ संविधान दिवस मनाया जा रहा है, दूसरी तरफ संविधान बचाने की आवाज को दबाया जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।”
सरदार पटेल के हवाले से सरकार पर निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. उदित राज ने सरदार वल्लभभाई पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ‘हिंदू राज’ की अवधारणा को अव्यावहारिक बताया था। उदित राज के अनुसार, आज की सरकार उनके विचारों के विपरीत दिशा में कार्य कर रही है।
धार्मिक नेताओं के नाम पर भी लगाए आरोप
डॉ. उदित राज ने आरोप लगाया कि कुछ धार्मिक व्यक्तियों को राजनीतिक समर्थन मिल रहा है और यह समर्थन चुनावी रणनीति के तहत दिया जा रहा है। उन्होंने इसे 2011 के अन्ना आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि उस समय भी सत्ता परिवर्तन की दिशा में सामाजिक आंदोलनों का राजनीतिक उपयोग किया गया था।
लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर चिंता
डोमा परिसंघ ने मांग की है कि:
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संवैधानिक आयोजनों को बाधित न किया जाए
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नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार दिया जाए
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लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए
फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से अनुमति न देने के पीछे कारणों की आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।










