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एक जीवन बचाने से लेकर अपना जीवन फिर से पाने तक: उन्नत की-होल हर्निया सर्जरी से मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास ने लिवर डोनर को दिया नया स्वास्थ्य

BPC News National Desk
4 Min Read

मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की प्रमुख इकाई मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास ने त्रिपुरा के अगरतला की 45 वर्षीय नूपुर सरकार का जटिल इन्सीजनल हर्निया उन्नत मिनिमली इनवेसिव (की-होल) सर्जरी से सफलतापूर्वक ठीक किया है।

नूपुर, जो पेशे से स्कूल शिक्षिका हैं, ने सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सुमंत डे (एचओडी – रोबोटिक, एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक, बैरिएट्रिक एवं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी) की देखरेख में लैप्रोस्कोपिक एब्डॉमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करवाई।

तीन साल पहले की शुरुआत: जब नूपुर बनीं डोनर

नूपुर की साहसिक यात्रा तीन साल पहले शुरू हुई, जब उनके पति को लिवर सिरोसिस हुआ और ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी।
एकमात्र उपयुक्त डोनर होने के नाते नूपुर ने अपने लिवर का हिस्सा दान कर पति की जान बचाई। आज उनके पति पूरी तरह स्वस्थ हैं।

हालांकि, कम आराम के साथ पेशेवर और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के कारण पुरानी सर्जरी वाली जगह पर बड़ा इन्सीजनल हर्निया विकसित हो गया, जो समय के साथ जटिल होता गया और दैनिक जीवन प्रभावित करने लगा।

ओपन सर्जरी का डर, की-होल विकल्प की तलाश

एक और बड़ी ओपन सर्जरी से डर के चलते नूपुर ने मिनिमली इनवेसिव विकल्प तलाशे और अगरतला से कोलकाता पहुंचीं।
विस्तृत जांच के बाद मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास की सर्जिकल टीम ने पुष्टि की कि उन्नत लैप्रोस्कोपिक तकनीकों से इलाज संभव है।

तीन घंटे की उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी

दिसंबर में करीब तीन घंटे तक चली लैप्रोस्कोपिक एब्डॉमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी डॉ. सुमंत डे ने अनुभवी एनेस्थेटिस्ट और कुशल ओटी टीम के सहयोग से पूरी तरह की-होल तकनीक से की।

इससे बड़े चीरे से बचा गया और सर्जिकल ट्रॉमा काफी कम रहा।

डॉक्टर का अनुभव: “उनकी मुस्कान सबसे बड़ा संतोष”

डॉ. सुमंत डे ने कहा,

“पहले बड़ी सर्जरी के बाद इतना जटिल इन्सीजनल हर्निया तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। उन्नत लैप्रोस्कोपिक तकनीकों की मदद से हम कम ट्रॉमा के साथ पेट की दीवार का सफल पुनर्निर्माण कर पाए। एनेस्थीसिया से जागने के बाद उनका पहला सवाल था—‘क्या यह लैप्रोस्कोपिक हुई?’ उनके चेहरे की राहत एक सर्जन के लिए सबसे बड़ा संतोष है।”

तेज और लगभग दर्दरहित रिकवरी

सर्जरी के बाद नूपुर की रिकवरी बेहद सहज और लगभग दर्दरहित रही।
वे चार घंटे के भीतर चलने लगीं और अगले ही दिन डिस्चार्ज हो गईं।
15 दिन के फॉलो-अप में वे पूरी तरह स्वस्थ पाई गईं।

मरीज की प्रतिक्रिया: “मुझे हिम्मत और भरोसा मिला”

नूपुर सरकार ने कहा,

“पति की जान बचाने के बाद एक और बड़ी सर्जरी से मैं बहुत डर रही थी। मणिपाल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने सिर्फ इलाज नहीं किया, बल्कि हिम्मत और भरोसा भी दिया। यह जानकर राहत मिली कि सर्जरी लैप्रोस्कोपिक तरीके से हुई। मैं उसी दिन चल पाई और अगले दिन घर लौट गई। डॉ. सुमंत डे और पूरी टीम की हमेशा आभारी रहूंगी।”

उन्नत सर्जरी की प्रभावशीलता का उदाहरण

यह सफल मामला दर्शाता है कि उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी जटिल पेट संबंधी समस्याओं के इलाज में, यहां तक कि पहले बड़ी सर्जरी करा चुके मरीजों में भी, कितनी प्रभावी है।

साथ ही, यह मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास की रोगी-केंद्रित, मिनिमली इनवेसिव और उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

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