गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने एलआईजी (लोअर इनकम ग्रुप) और ईडब्ल्यूएस (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) श्रेणी के फ्लैटों का पजेशन समय पर न देने वाले निजी विकासकर्ताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। जनसुनवाई के दौरान लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए GDA उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने तत्काल सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

छह सदस्यीय समिति गठित
उपाध्यक्ष के निर्देश पर प्राधिकरण सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति उन निजी विकासकर्ताओं की पहचान करेगी, जो नियमों के बावजूद एलआईजी/ईडब्ल्यूएस फ्लैटों का पजेशन देने में अनावश्यक देरी कर रहे हैं।
एक सप्ताह में बिल्डरों की सूची तलब
सचिव राजेश कुमार सिंह ने देर शाम अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश दिए कि—
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अपने-अपने क्षेत्रों में देरी करने वाले निजी बिल्डरों की सूची एक सप्ताह में तैयार करें
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एलआईजी/ईडब्ल्यूएस फ्लैटों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट समयबद्ध रूप से प्रस्तुत करें
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पूरे प्रकरण की कड़ी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कमजोर वर्ग के आवंटियों को अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं
केंद्र और राज्य सरकार के मानकों के अनुसार हर निजी आवासीय प्रोजेक्ट में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस फ्लैटों का समय पर निर्माण और पजेशन अनिवार्य है। इसके बावजूद हाल के वर्षों में कई बिल्डरों द्वारा देरी की शिकायतें सामने आई हैं, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
GDA की दो टूक चेतावनी
GDA ने साफ कर दिया है कि—
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दोषी विकासकर्ताओं के प्रोजेक्ट अनुमोदन रोके जा सकते हैं
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कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जाएंगे
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आवश्यक होने पर अन्य प्रशासनिक और दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी
कमजोर वर्ग को मिलेगी राहत
एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवास कमजोर वर्गों के लिए बेहद अहम हैं। GDA का यह कदम न केवल आवंटियों को राहत देगा, बल्कि निजी बिल्डरों को नियमों का पालन करने के लिए मजबूर भी करेगा।
प्राधिकरण के इस सख्त रुख से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में पजेशन में देरी के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और पात्र आवंटियों को समय पर उनका अधिकार मिलेगा।










