गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए डासना और मसूरी क्षेत्र में व्यापक ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। इस कार्रवाई में कुल 24,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया।
अवैध कॉलोनियों पर बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन जोन-03 की टीम ने उपाध्यक्ष के निर्देश पर कई स्थानों पर एक साथ बुलडोजर चलाया। कार्रवाई का नेतृत्व प्रभारी प्रवर्तन जोन-03 मो. सुभान ने किया।
इस दौरान अवैध रूप से विकसित की गई कॉलोनियों में बनी सड़कें, बाउंड्री वॉल और साइट ऑफिस को पूरी तरह तोड़ दिया गया।

किन-किन जगहों पर चला बुलडोजर?
GDA की टीम ने डासना और मसूरी क्षेत्र के कई स्थानों पर कार्रवाई की। इनमें प्रमुख स्थान शामिल हैं:
- खसरा संख्या 582, ग्राम मसूरी में लगभग 3000 वर्ग मीटर
- खसरा संख्या 1635, कुशलिया क्षेत्र में लगभग 5000 वर्ग मीटर
- हापुड़ रोड के पास फॉरेस्ट पार्क टाउनशिप के निकट लगभग 3000 वर्ग मीटर
- मसूरी क्षेत्र में रेलवे फाटक रोड के पास लगभग 8000 वर्ग मीटर
- मसूरी झील रोड पर लगभग 4000 वर्ग मीटर
इन सभी स्थानों पर अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
विरोध के बीच पूरी हुई कार्रवाई
ध्वस्तीकरण के दौरान स्थानीय कालोनाइजरों और निर्माणकर्ताओं ने विरोध करने की कोशिश की। हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिस बल और GDA टीम ने स्थिति को नियंत्रित रखा।
भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्रवाई बिना किसी रुकावट के पूरी की गई।
कौन-कौन अधिकारी रहे मौजूद?
इस अभियान के दौरान GDA के कई अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।
सहायक अभियंता, अवर अभियंता, सुपरवाइजर, मेट के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और GDA पुलिस बल ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।
GDA का सख्त संदेश
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि शहर में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
GDA की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और आने वाले दिनों में अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
लोगों के लिए चेतावनी
GDA ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे केवल स्वीकृत और वैध कॉलोनियों में ही संपत्ति खरीदें।
अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
डासना और मसूरी क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई शहर के नियोजित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन अब पूरी तरह सख्त रुख अपना चुका है।









