उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान अमृतधारी सिख छात्र से कृपाण उतरवाने की कोशिश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। घटना के बाद सिख समाज में भारी रोष देखने को मिला, जिसके बाद जिला प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट आदेश जारी कर दिए।
क्या है पूरा मामला?
17 फरवरी 2026 को एक अमृतधारी सिख छात्र 10वीं बोर्ड परीक्षा देने केंद्र पर पहुंचा था।
आरोप है कि:
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परीक्षा केंद्र के प्रिंसिपल ने छात्र को कृपाण उतारने को कहा
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छात्र ने बताया कि कृपाण सिख धर्म के पांच ककारों में अनिवार्य है
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कृपाण की लंबाई लगभग 4 इंच थी, जो कानून के तहत वैध मानी जाती है
परिवार और सिख समाज का आरोप है कि प्रशासन ने धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं किया और छात्र की परीक्षा भी प्रभावित हुई।
सिख समाज का विरोध और प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
घटना के बाद सिख समाज में आक्रोश फैल गया।
आरएलडी नेता इन्द्रजीत सिंह टीटू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे:
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जसविंदर सिंह सनी
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गगन सिंह अरोड़ा
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कुलदीप सिंह
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तरसेम सिंह सग्गू
उन्होंने साफ कहा कि परीक्षा के नाम पर धार्मिक प्रतीकों से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
डीएम का हस्तक्षेप और डीआईओएस का आदेश
मामले की गंभीरता देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की।
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने पूरे जनपद के स्कूलों को आदेश जारी किए:
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किसी छात्र को धार्मिक प्रतीकों के कारण रोका नहीं जाएगा
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केंद्राध्यक्षों को संवेदनशीलता बरतने के निर्देश
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भविष्य में शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई
स्कूल प्रशासन की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद संबंधित स्कूल प्रशासन ने:
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गलती स्वीकार की
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लिखित आश्वासन दिया कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी
हालांकि सिख समाज ने चेतावनी दी है कि धार्मिक अधिकारों पर किसी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी।
बड़ा संदेश: धार्मिक स्वतंत्रता और शिक्षा का संतुलन
यह घटना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) की याद दिलाती है।
सिख धर्म में कृपाण:
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आस्था का प्रतीक
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सम्मान और रक्षा का चिन्ह
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अमृतधारी सिखों के लिए अनिवार्य
प्रशासन के हस्तक्षेप से यह सुनिश्चित हुआ कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में धार्मिक अधिकारों का सम्मान बना रहे।
निष्कर्ष
गाजियाबाद की यह घटना अब एक मिसाल बन गई है कि शिक्षा और आस्था के बीच टकराव की जगह संवाद और संवेदनशीलता जरूरी है।
सिख समाज ने प्रशासन के फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि ऐसे निर्देश पूरे प्रदेश में लागू होंगे।








