गाज़ियाबाद नगर निगम हाउस टैक्स केस: इलाहाबाद हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2025 को निर्धारि
प्रदेश के गाज़ियाबाद शहर में हाउस टैक्स (संपत्ति कर) को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) में अगली सुनवाई की तारीख 3 दिसंबर 2025 तय की गई है। यह मामला गाज़ियाबाद नगर निगम द्वारा लागू की गई नई टैक्स संरचना के खिलाफ है, जिससे आम नागरिकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
गाज़ियाबाद नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संपत्ति कर में भारी वृद्धि की योजना बनाई थी, जो शहर के लाखों निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गई। नई संरचना के तहत टैक्स दरों में 20-30% तक की बढ़ोतरी प्रस्तावित थी, जिससे मध्यम वर्ग के परिवारों की जेब ढीली होने की आशंका जताई गई। इस वृद्धि का विरोध न केवल स्थानीय पार्षदों ने किया, बल्कि आम जनता ने भी सोशल मीडिया और स्थानीय फोरम पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
इसके परिणामस्वरूप, पूर्व पार्षद राजेंद्र त्यागी, हिमांशु मित्तल और अनिल स्वामी सहित तीन पूर्व पार्षदों ने जून 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की। याचिका में दावा किया गया कि नई टैक्स प्रणाली पारदर्शी नहीं है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि बिना पर्याप्त जन-सहमति के टैक्स बढ़ाना असंवैधानिक है, खासकर जब शहर की बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, जल निकासी और सफाई अभी भी अपर्याप्त हैं।
कोर्ट की पिछली कार्यवाहियां
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया और जून 2025 में पहली सुनवाई के दौरान नगर निगम को नोटिस जारी किया। जुलाई 2025 में हुई सुनवाई में कोर्ट ने टैक्स वृद्धि पर अस्थायी रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन नगर निगम को निर्देश दिया कि वह प्रभावित पक्षों से आपत्तियां दर्ज करे। इस बीच, जून 30, 2025 को गाज़ियाबाद नगर निगम के बोर्ड की विशेष बैठक में 99% पार्षदों ने टैक्स वृद्धि का विरोध किया। बैठक में गाज़ियाबाद सांसद अतुल गर्ग और स्थानीय विधायकों सुनील शर्मा, संजीव शर्मा तथा अजित पाल त्यागी की मौजूदगी में प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। मेयर सुनीता दयाल ने कहा, “यह निर्णय आम आदमी की परेशानी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।”
हालांकि, नगर निगम ने जुलाई 2025 में फिर से एसएमएस के माध्यम से निवासियों को बढ़े हुए टैक्स का भुगतान करने के लिए निर्देश जारी किए, जिससे विवाद और गहरा गया। जुलाई 29, 2025 की सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों को और दलीलें पेश करने का मौका दिया, लेकिन अंतिम फैसला सुरक्षित रखा।
वर्तमान अपडेट: 3 दिसंबर की नई तारीख
नवीनतम अपडेट के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2025 के लिए निर्धारित की है। यह स्थगन कोर्ट की डायरी में दर्ज है, जहां याचिकाकर्ताओं ने अतिरिक्त दस्तावेज और आंकड़े पेश करने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुनवाई में कोर्ट टैक्स संरचना की वैधता पर फैसला ले सकता है, जो न केवल गाज़ियाबाद बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के अन्य नगर निगमों के लिए मिसाल कायम करेगा।
याचिकाकर्ता राजेंद्र त्यागी ने कहा, “हम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह केवल टैक्स का मुद्दा नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल है।” दूसरी ओर, नगर निगम के अधिकारी का कहना है कि टैक्स वृद्धि शहर के विकास के लिए आवश्यक है, लेकिन वे कोर्ट के निर्देशों का पालन करेंगे।
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
यह मामला गाज़ियाबाद के करीब 20 लाख निवासियों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां संपत्ति कर शहर की आय का प्रमुख स्रोत है। यदि कोर्ट टैक्स वृद्धि को रद्द करता है, तो नगर निगम को वैकल्पिक राजस्व स्रोत ढूंढने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवासी आधिकारिक पोर्टल (onlinegnn.com) पर जाकर अपनी टैक्स स्थिति जांचें और सुनवाई के फैसले का इंतजार करें।
यह केस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिक भागीदारी का एक उदाहरण है, जहां जन-आंदोलन ने सरकारी नीतियों को चुनौती दी। 3 दिसंबर की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जो न केवल आर्थिक राहत दे सकती है बल्कि प्रशासनिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।










