बहुजन समाज में वैचारिक जागृति और सामाजिक उत्थान को नई दिशा देने के उद्देश्य से बहुजन इंटेलेक्चुअल फोरम (BIF) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। 23 फरवरी 2026 को गोविंदपुरम स्थित सिग्नेचर स्टेट शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में फोरम के नए कार्यालय का भव्य उद्घाटन किया गया।
यह कार्यक्रम बाबा गाडगे महाराज की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसे पूरे देश में उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।
सामाजिक जागरूकता और संगठन पर जोर
इस कार्यक्रम का आयोजन बहुजन नायक संघ फाउंडेशन के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एडवोकेट रामेश्वर दत्त ने की, जबकि दीप प्रज्वलन तरुण कुमार और एडवोकेट गजेंद्र सिंह द्वारा किया गया।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ. अश्वजीत ने विशेष सहभागिता करते हुए समाज में शिक्षा और संगठन की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रतिभागियों ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम में कुमारी ज्योति सिंह (पैरा लीगल वर्कर), रूबी, रचना और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बहुजन समाज में जागरूकता बढ़ाने पर अपने विचार रखे।
अलीगढ़ से एस.एस. आदित्य और मोदी नगर से के.पी. सिंह ने भी सक्रिय सहभागिता की। इस अवसर पर बच्चों को ट्रस्ट की ओर से लेखन सामग्री वितरित की गई और संत गाडगे महाराज के जीवन पर आधारित पुस्तिकाएं भी बांटी गईं।
मीडिया सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और बहुजन उत्थान के लिए ठोस कदम उठाना है।
फोरम ने वर्ष 2028 तक एक मजबूत मीडिया सेंटर स्थापित करने का संकल्प लिया है, जो डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम के विचारों से प्रेरित है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की रही भागीदारी
कार्यक्रम में शैलेंद्र कुमार, सतीश कुमार, चंद्र प्रकाश दिवाकर, लालू दिवाकर, नैनी बौद्ध, गीतम सिंह, संजय सिंह, प्रदीप दिवाकर, संतोष कुमार दिवाकर सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक डॉ. भारत सत्यार्थी ने संत गाडगे महाराज के जीवन और उनके सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला और सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
बहुजन समाज के लिए महत्वपूर्ण पहल
यह आयोजन केवल जयंती समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बहुजन समाज में शिक्षा, संगठन और जागरूकता की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहलें समाज में वैचारिक मजबूती और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देती हैं।







