म्यूजिक इंडस्ट्री के दिग्गज और टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की हत्या के प्रमुख दोषियों में शामिल अब्दुल रऊफ मर्चेंट उर्फ रऊफ दाऊद मर्चेंट की जेल में मौत हो गई है। 60 वर्षीय रऊफ ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित हरसूल सेंट्रल जेल में अंतिम सांस ली। जेल अधिकारियों के मुताबिक, रऊफ की मौत दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से हुई।
लंबे समय से बीमार चल रहा था रऊफ मर्चेंट
जेल सूत्रों के अनुसार, रऊफ मर्चेंट लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित था। उसे दिल से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ अन्य पुरानी बीमारियां भी थीं।
मौत से कुछ देर पहले उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उसे जेल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद जेल प्रशासन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
1997 में गुलशन कुमार की हुई थी हत्या
गौरतलब है कि 1997 में मुंबई के जुहू स्थित एक मंदिर के बाहर गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला उस समय देशभर में सुर्खियों में आ गया था और बॉलीवुड से लेकर अंडरवर्ल्ड तक हलचल मच गई थी।
जांच में सामने आया था कि इस हत्याकांड के पीछे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का हाथ था। अब्दुल रऊफ मर्चेंट को इस साजिश का मुख्य किरदार और हमलावरों में से एक माना गया था।
उम्रकैद की सजा काट रहा था रऊफ
अदालत ने रऊफ मर्चेंट को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह पिछले कई वर्षों से हरसूल सेंट्रल जेल में बंद था। उसकी गिनती इस केस के मुख्य दोषियों में होती थी।
बॉलीवुड-अंडरवर्ल्ड गठजोड़ को किया था उजागर
गुलशन कुमार हत्याकांड ने न केवल बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया था, बल्कि अंडरवर्ल्ड और फिल्म जगत के गठजोड़ को भी उजागर किया था। यह मामला उस दौर के सबसे सनसनीखेज अपराधों में से एक माना जाता है।
पुलिस ने साजिश या संदिग्ध स्थिति से किया इनकार
जेल और पुलिस अधिकारियों ने रऊफ की मौत को लेकर किसी भी संदिग्ध परिस्थिति से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत पूरी तरह प्राकृतिक कारणों से हुई है।
परिवार की ओर से बयान नहीं
रऊफ मर्चेंट के परिवार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, इस पुराने और चर्चित अंडरवर्ल्ड केस से जुड़े होने के कारण उसकी मौत एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।
एक युग का अंत
रऊफ मर्चेंट की मौत के साथ ही गुलशन कुमार हत्याकांड का एक अहम अध्याय समाप्त हो गया है। यह केस आज भी भारतीय अपराध इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है।









