उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के सबसे पवित्र स्थलों में से एक गंगोत्री धाम में अब गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले की जानकारी समिति के चेयरमैन सुरेश सेमवाल ने आधिकारिक रूप से दी।
इस निर्णय के तहत अब केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों को ही गंगोत्री धाम और उसके शीतकालीन निवास मुखबा में प्रवेश की अनुमति होगी।
“धार्मिक पवित्रता की रक्षा के लिए जरूरी कदम” – सुरेश सेमवाल
श्री गंगोत्री मंदिर समिति के चेयरमैन सुरेश सेमवाल ने कहा:
“गंगोत्री धाम मां गंगा के उद्गम स्थल के रूप में हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र है। यहां की सनातन परंपराओं और पूजा-पाठ की मर्यादा बनाए रखने के लिए यह फैसला आवश्यक था।”
उन्होंने बताया कि समिति के सभी सदस्यों से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है, ताकि धाम की आध्यात्मिक गरिमा और वैदिक परंपराएं अक्षुण्ण बनी रहें।
किन स्थानों पर लागू होगा प्रतिबंध?
मंदिर समिति के अनुसार यह प्रतिबंध निम्न स्थानों पर लागू होगा:
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गंगोत्री मंदिर परिसर
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गंगोत्री घाट
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भैरोंघाटी
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सभी संबंधित पूजा स्थल
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शीतकालीन निवास मुखबा
जब गंगोत्री धाम सर्दियों में बंद रहता है और मुखबा में मां गंगा की पूजा होती है, तब भी यही नियम लागू रहेगा।
चारधाम यात्रा में बढ़ती बहस
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब:
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श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC)
ने भी बद्रीनाथ, केदारनाथ और अपने अधीन आने वाले
48 मंदिरों और कुंडों में
गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है।
उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि वह:
मंदिर समितियों की सिफारिशों पर विचार कर रही है और
जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रतिक्रियाएं
समर्थकों का तर्क:
समर्थकों का कहना है कि यह फैसला:
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धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए जरूरी है
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सनातन परंपराओं की रक्षा करता है
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पहले से ही:
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जगन्नाथ पुरी
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तिरुपति बालाजी
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सबरीमाला
जैसे मंदिरों में लागू है
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विरोधियों की आपत्ति:
कुछ राजनीतिक दलों और पर्यटन विशेषज्ञों ने कहा कि:
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यह फैसला संवैधानिक बहस को जन्म देता है
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इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटक और अन्य धर्मों के श्रद्धालु प्रभावित होंगे
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उत्तराखंड के पर्यटन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है
पर्यटन पर संभावित असर
आंकड़ों के अनुसार:
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पिछले साल गंगोत्री धाम में
8 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे
समिति का मानना है कि:
“धार्मिक महत्व आर्थिक लाभ से ऊपर है।
गंगोत्री पर्यटन स्थल नहीं, आस्था का केंद्र है।”
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि:
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विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या घट सकती है
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स्थानीय पर्यटन व्यवसाय प्रभावित हो सकता है
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने इस फैसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार:
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बद्रीनाथ
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केदारनाथ
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यमुनोत्री
जैसे अन्य धामों में भी इसी तरह के नियम लागू करने पर गंभीर विचार चल रहा है।
धार्मिक अस्मिता बनाम संवैधानिक बहस
गंगोत्री मंदिर समिति का यह फैसला:
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उत्तराखंड की धार्मिक अस्मिता को मजबूत करता है
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सनातन परंपराओं को संरक्षण देता है
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लेकिन साथ ही:
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धार्मिक स्वतंत्रता
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समानता के अधिकार
पर नई बहस भी खड़ी करता है
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यह मुद्दा अब सिर्फ गंगोत्री तक सीमित नहीं रहा, बल्कि
पूरी चारधाम यात्रा की भविष्य की दिशा तय करने वाला फैसला बन चुका है।









