गाजियाबाद नगर निगम से जुड़े हाउस टैक्स प्रकरण पर माननीय उच्च न्यायालय में अंतिम निर्णय को लेकर लगातार देरी हो रही है। सिविल मिसलेनियस रिट पिटिशन (PIL) नंबर 1427/2025 पिछले 7 महीनों से इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन वादी पक्ष के अधिवक्ताओं की बार-बार अनुपस्थिति के कारण सुनवाई नहीं हो पा रही है। इससे न केवल शहरवासियों को असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि नगर निगम को भी भारी राजस्व हानि हो रही है।
नगर निगम और पूर्व पार्षद राजेंद्र त्यागी तथा हिमांशु मित्तल की ओर से लगातार पैरवी की जा रही है, लेकिन अंतिम निर्णय के अभाव में कर वसूली और आगे की योजना प्रभावित हो रही है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी का बयान
नगर निगम के प्रभारी राजस्व / मुख्य कर निर्धारण अधिकारी सुनील कुमार राय ने बताया कि:
“पिछले 7 महीनों से हाउस टैक्स से संबंधित प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में लंबित है। जब भी अंतिम सुनवाई की तिथि तय होती है, याची कर्ता के अधिवक्ता पुकार लगने पर अनुपस्थित हो जाते हैं। इससे सुनवाई नहीं हो पाती और निर्णय टल जाता है।”
उन्होंने बताया कि 16 जनवरी 2026 को भी यही स्थिति बनी। उस दिन:
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नगर निगम गाजियाबाद के पैनल अधिवक्ता उपस्थित थे
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शासन की ओर से अपर महाधिवक्ता भी मौजूद थे
लेकिन याची कर्ताओं के वकील अनुपस्थित रहे, जिसके कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
तीसरी बार हुई ऐसी स्थिति
रिकॉर्ड के अनुसार:
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19 नवंबर 2025
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26 नवंबर 2025
और अब 16 जनवरी 2026
इन तीनों तारीखों पर याची कर्ता के वकील अदालत में उपस्थित तो हुए, लेकिन नंबर आने पर अनुपस्थित पाए गए, जिससे सुनवाई नहीं हो पाई। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति लगातार तीसरी बार सामने आई है।
निगम और शहर को हो रहा नुकसान
हाउस टैक्स पर अंतिम निर्णय न होने के कारण:
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नगर निगम की राजस्व वसूली प्रभावित हो रही है
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शहर की आर्थिक योजना और विकास कार्य अटके हुए हैं
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नागरिकों में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है
प्रभारी राजस्व अधिकारी ने साफ कहा कि:
“हाउस टैक्स पर निर्णय न होने का खामियाजा निगम और शहरवासी भुगत रहे हैं।”
23 जनवरी 2026 को अगली संभावित सुनवाई
अब इस प्रकरण में अगली संभावित तिथि 23 जनवरी 2026 बताई जा रही है। नगर निगम प्रशासन को उम्मीद है कि:
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सभी अधिवक्ता समय पर उपस्थित होंगे
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सुनवाई पूरी होगी
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और शहर को हाउस टैक्स प्रकरण में स्पष्ट दिशा मिलेगी
अंतिम निर्णय के बाद ही नगर निगम आगे की कर वसूली और नीति निर्धारण की कार्रवाई को गति दे सकेगा।
शहर की निगाहें हाईकोर्ट पर
फिलहाल पूरा गाजियाबाद शहर माननीय उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि:
“माननीय उच्च न्यायालय का निर्णय सर्वोपरि है। उसके बाद ही शहर के हित में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।”
शहरवासियों को उम्मीद है कि 23 जनवरी की सुनवाई में यह लंबित मामला सुलझेगा और हाउस टैक्स व्यवस्था को लेकर चल रही अनिश्चितता समाप्त होगी।








