वाराणसी। रमजान के दौरान गंगा नदी में नाव पर इफ्तार करने का एक वीडियो वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में कुछ युवक गंगा नदी के बीच नाव पर बैठकर इफ्तार करते नजर आ रहे हैं, जिसमें नॉन-वेज भोजन किया गया और अवशेष नदी में फेंकने का आरोप है।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ केस
मामला कोतवाली थाना में दर्ज किया गया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर कार्रवाई की गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि गंगा में नॉन-वेज भोजन करना और उसके अवशेष फेंकना हिंदू धर्म की आस्था के खिलाफ है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
किन धाराओं में केस दर्ज?
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
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धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना
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सार्वजनिक उपद्रव
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पर्यावरण नियमों का उल्लंघन
सोशल मीडिया के लिए बनाया गया था वीडियो
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार युवक मुख्य रूप से मदनपुरा क्षेत्र के निवासी हैं और उनकी उम्र 24 से 26 वर्ष के बीच है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वीडियो सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया था।
नाव मालिक भी हिरासत में
रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस नाव पर इफ्तार किया जा रहा था, उसके मालिक को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस ने घटना के 24 घंटे के भीतर कार्रवाई पूरी कर ली।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
इस मामले पर कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:
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अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या गंगा पर इफ्तार नहीं किया जा सकता
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इमरान मसूद ने कहा कि किसी की भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए
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AIMIM ने इसे मुसलमानों के प्रति भेदभाव का मामला बताया
पुलिस का पक्ष
पुलिस का कहना है कि कार्रवाई वायरल वीडियो और प्राप्त शिकायत के आधार पर कानून के तहत की गई है। मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
संवेदनशील मुद्दा बना मामला
यह घटना धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को फिर से सामने लाती है, खासकर वाराणसी जैसे धार्मिक महत्व वाले शहर में, जहां गंगा का विशेष स्थान है।








