विश्व स्तर पर हीरे, रंगीन रत्नों और आभूषणों के प्रमाणन के लिए जानी जाने वाली इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (IGI) ने जयपुर में अपनी दूसरी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया है। यह नई प्रयोगशाला सीतापुरा क्षेत्र में स्थापित की गई है, जो रत्न एवं आभूषण उद्योग का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
इस विस्तार के साथ उत्तर भारत में आईजीआई की उपस्थिति और अधिक मजबूत हो गई है।
रत्न-आभूषण उद्योग के केंद्र के करीब रणनीतिक विस्तार
सीतापुरा क्षेत्र जयपुर की ऐतिहासिक और समृद्ध रत्न-आभूषण परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां पोल्की, कटे हुए रंगीन रत्न और उत्कृष्ट कारीगरी का लंबा इतिहास है।
आईजीआई की यह नई प्रयोगशाला उद्योग के नजदीक रहकर स्थानीय निर्माताओं, निर्यातकों और खुदरा व्यापारियों को तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय प्रमाणन सेवाएं प्रदान करेगी।
रंगीन रत्नों की बढ़ती मांग पर आईजीआई का फोकस
उद्घाटन अवसर पर आईजीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं ग्लोबल सीईओ तेहमास्प प्रिंटर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं की पसंद में तेजी से बदलाव आ रहा है।
उन्होंने बताया कि फ्यूजन डिजाइनों, पर्सनलाइज्ड ज्वेलरी और दुर्लभ रंगीन रत्नों के प्रति बढ़ते आकर्षण के कारण इनकी मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उनके अनुसार, आईजीआई ने इस बदलाव को समय रहते पहचान कर उन्नत तकनीक के साथ तैयारी की है।
उन्नत तकनीक से होगी रत्नों की गहन जांच
रंगीन रत्नों की उत्पत्ति (Origin) और उनमें किए गए ट्रीटमेंट की पहचान अत्यंत जटिल प्रक्रिया होती है। इसके लिए उच्च विशेषज्ञता और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है।
जयपुर की नई प्रयोगशाला में
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रमन स्पेक्ट्रोमेट्री
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यूवी-विज़-एनआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी
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एक्स-रे फ्लोरेसेंस (XRF)
जैसी विश्वस्तरीय तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे रत्नों की आंतरिक संरचना, रासायनिक संघटन और समावेशन का सटीक विश्लेषण संभव होगा।
प्रमाणन के साथ कौशल विकास पर भी जोर
यह प्रयोगशाला हीरे और रंगीन रत्नों के लिए आईजीआई की संपूर्ण प्रमाणन सेवाएं उपलब्ध कराएगी। इससे पूरी वैल्यू चेन में पारदर्शिता, उपभोक्ता संरक्षण और वैश्विक विश्वास को मजबूती मिलेगी।
इसके साथ-साथ आईजीआई स्कूल ऑफ जेमोलॉजी के माध्यम से क्षेत्रीय कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे, जो आधुनिक जेमोलॉजिकल प्रशिक्षण और शिक्षा प्रदान करेंगे।
वैश्विक नेटवर्क में एक और महत्वपूर्ण कड़ी
आईजीआई अब 10 देशों में कुल 35 प्रयोगशालाएं संचालित कर रहा है और इसके 21 स्कूल ऑफ जेमोलॉजी सक्रिय हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि जयपुर की यह नई लैब भारत को रंगीन रत्नों के प्रमाणन और गुणवत्ता जांच का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
यह कदम भारतीय रत्न-आभूषण उद्योग की अंतरराष्ट्रीय साख और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करेगा।







