नई दिल्ली, 19 जनवरी 2026। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बेहद सकारात्मक संकेत देते हुए वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह अक्टूबर 2025 में जारी किए गए 6.6 प्रतिशत के अनुमान से 0.7 प्रतिशत अंक अधिक है। IMF की इस ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) अपडेट रिपोर्ट ने भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और तेज़ विकास को वैश्विक मंच पर फिर से स्थापित कर दिया है।
IMF ने कहा कि भारत में आर्थिक गतिविधियों ने तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है और चौथी तिमाही में भी ग्रोथ की रफ्तार मजबूत बनी हुई है, जिसके चलते ग्रोथ अनुमान में यह बढ़ोतरी की गई है।
बेहतर प्रदर्शन से बढ़ा ग्रोथ अनुमान
IMF की रिपोर्ट में कहा गया है—
“भारत के लिए ग्रोथ अनुमान को 0.7 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया गया है, जो तीसरी तिमाही के बेहतर प्रदर्शन और चौथी तिमाही में मजबूत मोमेंटम को दर्शाता है।”
यह अनुमान भारत सरकार के आधिकारिक ग्रोथ अनुमान 7.4 प्रतिशत के बेहद करीब है, जो यह दिखाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था सही दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना भारत
IMF ने स्पष्ट किया है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। इसके पीछे कई मजबूत कारण हैं—
- मजबूत घरेलू मांग
- इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश
- मैन्युफैक्चरिंग और मेक इन इंडिया को बढ़ावा
- डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम
- सरकारी नीतियों की स्थिरता और सुधारों का प्रभाव
IMF का मानना है कि इन कारकों ने भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनाए रखा है।
2026-27 में ग्रोथ थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन तस्वीर सकारात्मक
हालांकि IMF ने भविष्य के लिए सतर्कता भी जताई है। रिपोर्ट के अनुसार 2026 और 2027 में भारत की ग्रोथ 6.4 प्रतिशत तक आ सकती है, क्योंकि कुछ अस्थायी और चक्रीय कारकों का असर कम होगा।
वैश्विक स्तर पर IMF ने 2026 के लिए ग्रोथ 3.3 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो व्यापार नीतियों में बदलाव, भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी निवेश (विशेषकर AI) के प्रभाव को दर्शाता है।
मुद्रास्फीति में राहत की उम्मीद, निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत
IMF ने भारत में महंगाई को लेकर भी राहत भरी खबर दी है। रिपोर्ट के अनुसार खाद्य कीमतों में नरमी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सुधार से मुद्रास्फीति में गिरावट देखने को मिल सकती है।
हालांकि, IMF ने यह भी चेतावनी दी है कि वैश्विक जोखिम जैसे—
- व्यापार युद्ध
- भू-राजनीतिक तनाव
- टेक्नोलॉजी सेक्टर में वैल्यूएशन अस्थिरता
भविष्य में चुनौती बने रह सकते हैं।
विशेषज्ञों और सरकार ने जताया भरोसा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आर्थिक विशेषज्ञों ने IMF की रिपोर्ट का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह अनुमान भारत की मजबूत आर्थिक नीतियों, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, डिजिटल इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रगति का प्रमाण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ग्रोथ अनुमान निवेशकों और उद्योग जगत के लिए बड़ा भरोसा पैदा करता है और भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार देता है।








