रजापुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम इंद्रगढ़ी (डासना देहात क्षेत्र) में नालों की समय पर सफाई न होने से हालात बेकाबू हो गए हैं। नालों के पूरी तरह चौक हो जाने के कारण गंदा पानी सड़कों पर भर गया है, जिससे पूरे गांव में जलभराव, गंदगी और दुर्गंध का माहौल बन गया है।
हल्की बारिश में ही डूब गई सड़कें
स्थानीय लोगों के अनुसार, नालों की लंबे समय से सफाई नहीं कराई गई है। हालात यह हैं कि हल्की बारिश या नाले के ओवरफ्लो होते ही सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं।
नाले का पानी पास स्थित तालाब/जोहड़ में भी भर गया है, जिससे आसपास के इलाकों में बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कोई कार्रवाई
ग्रामीणों का कहना है कि:
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नालों की सफाई को लेकर
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ग्राम पंचायत
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ब्लॉक प्रशासन
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संबंधित विभाग
को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
लोगों का आरोप है कि शिकायतें सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाती हैं।
बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी
जलभराव के कारण:
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बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल
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बुजुर्गों और महिलाओं का घर से निकलना खतरे से खाली नहीं
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दोपहिया और पैदल चलना लगभग असंभव
गंदे पानी में मच्छरों की भरमार हो गई है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
विकास के नाम पर खर्च, ज़मीनी हकीकत बदहाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये का बजट खर्च किया जाता है, तो फिर:
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नालों की नियमित सफाई क्यों नहीं?
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जलनिकासी की उचित व्यवस्था क्यों नहीं?
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तालाबों और जोहड़ों का संरक्षण क्यों नहीं?
उनका कहना है कि डासना देहात में विकास सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।
जिम्मेदारी किसकी? पंचायत या प्रशासन?
क्षेत्रवासियों का सीधा सवाल है:
“नालों की सफाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है—ग्राम पंचायत, ब्लॉक प्रशासन या संबंधित विभाग की?”
ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आंदोलन किया जाएगा।
हेल्प एशियन फाउंडेशन ने दी आंदोलन की चेतावनी
हेल्प एशियन फाउंडेशन संस्था के राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप शर्मा ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा:
“एक ओर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छता और साफ-सफाई को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं गाजियाबाद के रजापुर ब्लॉक अंतर्गत डासना देहात क्षेत्र की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि:
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जिम्मेदार अधिकारी कुर्सी पर बैठे हैं
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लेकिन जमीनी निरीक्षण न के बराबर है
चेतावनी दी कि यदि जलभराव की समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो संस्था स्थानीय लोगों के साथ सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।







