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ईरानी विदेश मंत्री का भारत दौरा रद्द, जयशंकर से फोन पर बात: ईरान संकट पर चर्चा

BPC News National Desk
5 Min Read

ईरान में जारी जंग की आहट और बढ़ते राजनीतिक-सैन्य तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का प्रस्तावित भारत दौरा रद्द कर दिया गया है। वह 15–16 जनवरी को नई दिल्ली आने वाले थे, लेकिन नवीनतम घटनाक्रम को देखते हुए यह दौरा टाल दिया गया। हालांकि, दौरे से ठीक पहले अराघची ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से फोन पर बातचीत की, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद जारी रहने का संकेत मिला है।

जयशंकर ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए लिखा:

“Received a call from Iranian Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi. We discussed the evolving situation in and around Iran.”

बातचीत में क्या हुआ?

14 जनवरी 2026 को हुई इस फोन कॉल में मुख्य रूप से ईरान और उसके आसपास की तेजी से बदलती स्थिति पर चर्चा हुई। ईरान में इन दिनों बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के खिलाफ आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई में हजारों मौतें और गिरफ्तारियां हुई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरानियों से विरोध जारी रखने की अपील की और “help is on the way” जैसे बयान दिए, जिससे संभावित सैन्य हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई है।

इसी संदर्भ में अराघची ने जयशंकर को बताया कि ईरान किसी भी “destabilizing plots” या बाहरी हस्तक्षेप का मुकाबला करने में सक्षम है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को कुछ “terrorist organizations” हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं और ईरान के आंतरिक मामलों में दखल की कड़ी निंदा की।

दौरा क्यों रद्द हुआ?

अराघची का 15–16 जनवरी का प्रस्तावित भारत दौरा रद्द होने के पीछे मुख्य वजह ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन, मौतों की संख्या (कुछ रिपोर्ट्स में 3,000 से अधिक) और अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई बताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा हालात और तेजी से बदलते घटनाक्रम के चलते ईरानी नेतृत्व ने दौरा फिलहाल टालने का फैसला किया।

दौरे का एजेंडा क्या था?

यदि दौरा होता, तो अराघची की मुलाकात:

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर

  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल

  • पोर्ट्स मंत्री सर्वानंद सोनोवाल
    से होनी थी।

एजेंडा में शामिल थे:

  • चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट का भविष्य (अप्रैल 2026 में US sanctions waiver खत्म होने वाला है)

  • द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा

  • 2026 में भारत–ईरान कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के आयोजनों की शुरुआत

  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जुड़े मुद्दे

भारत की प्रतिक्रिया और एडवाइजरी

ईरान में फंसे लगभग 9,000 भारतीय नागरिकों (जिनमें बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल हैं) की सुरक्षा को देखते हुए भारत सरकार ने सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें:

  • सभी भारतीयों को उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने की सलाह

  • गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील
    की गई है।

भारतीय दूतावास ने नागरिकों से संपर्क में रहने और हेल्पलाइन पर रजिस्टर करने को कहा है।
इस बीच, एयर इंडिया समेत कई एयरलाइंस ने उड़ानों को रीरूट किया है, जिससे एविएशन सेक्टर में भी हलचल मची हुई है।

निहितार्थ: भारत-ईरान रिश्तों की जटिलता

यह घटनाक्रम भारत–ईरान संबंधों की जटिल प्रकृति को उजागर करता है।

  • भारत चाबहार पोर्ट के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपनी रणनीतिक पहुंच बनाए रखना चाहता है।

  • वहीं दूसरी ओर, उसे अमेरिका के साथ अपने संबंधों और प्रतिबंधों के संतुलन का भी ध्यान रखना पड़ता है।

ईरान में बढ़ती अस्थिरता से क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल दोनों देश हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं। अराघची का फोन कॉल यह संकेत देता है कि कूटनीतिक चैनल खुले हैं, लेकिन जंग की आहट और बढ़ते तनाव के कारण स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।

उम्मीद की जा रही है कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम होगा और क्षेत्रीय शांति की दिशा में कोई रास्ता निकलेगा।

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