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इजरायल ने ईरान को वैश्विक खतरा करार देते हुए जारी किया मिसाइल रेंज का मानचित्र, भारत भी रेंज में शामिल

BPC News National Desk
4 Min Read

इजरायल लगातार ईरान को न केवल अपने लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बताता रहा है। अब Israel Defense Forces (IDF) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ईरानी मिसाइलों की रेंज दिखाने वाला एक विस्तृत मानचित्र सार्वजनिक किया है। इस ईरान मिसाइल रेंज मानचित्र में विभिन्न दूरी वाले वृत्तों (concentric circles) के माध्यम से मिसाइलों की पहुंच को दर्शाया गया है, जिसमें भारत के बड़े हिस्से भी शामिल बताए गए हैं।

यह पहला अवसर है जब IDF ने सार्वजनिक रूप से इस तरह का विस्तृत मानचित्र साझा किया है, जिसमें भारत के अलावा रूस, चीन के अधिकांश क्षेत्र और पूरे यूरोप को ईरानी मिसाइलों की जद में दिखाया गया है।

IDF का आधिकारिक बयान

IDF के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट की गई तस्वीर के साथ कैप्शन था कि ईरानी शासन की धमकी केवल इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र और विश्व के लिए खतरा है।

जारी मानचित्र में ईरानी मिसाइलों की रेंज को 300 किलोमीटर, 1,000 किलोमीटर, 2,000 किलोमीटर और 3,000 किलोमीटर तक के दायरों में विभाजित किया गया है।

भारत भी ईरानी मिसाइल रेंज में

मानचित्र के अनुसार:

  • पश्चिमी भारत (गुजरात, राजस्थान जैसे क्षेत्र) लगभग 1,000 किलोमीटर रेंज में आते हैं।

  • उत्तर और मध्य भारत सहित आधे से अधिक भारतीय क्षेत्र 2,000 किलोमीटर की रेंज में शामिल हैं।

  • 3,000 किलोमीटर की अधिकतम रेंज वाली मिसाइलें पूरे भारत को कवर कर सकती हैं, जिनमें पूर्वी और दक्षिणी हिस्से भी शामिल बताए गए हैं।

इस ईरान मिसाइल रेंज मानचित्र ने भारत में भी रणनीतिक चर्चा को जन्म दिया है।

कौन-सी मिसाइलें रेंज में शामिल?

मानचित्र में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे Khorramshahr और Shahab-3 को दर्शाया गया है, जिनकी रेंज 2,000 से 3,000 किलोमीटर तक मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की मिसाइल तकनीक पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुई है और लंबी दूरी की मिसाइलें क्षेत्रीय सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंच सकती हैं।

भारत को लेकर विवाद

इस मानचित्र के शुरुआती संस्करण को लेकर भारत में विवाद भी हुआ था। आरोप था कि भारत की सीमाओं (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर राज्यों) को गलत तरीके से दर्शाया गया। बाद में IDF ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह केवल एक इलस्ट्रेशन है, सटीक सीमांकन का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

बढ़ता इजरायल-ईरान तनाव

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब Israel और Iran के बीच तनाव चरम पर है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच मिसाइल और हवाई हमलों का आदान-प्रदान हुआ है।

इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में मिसाइल दागे हैं।

भारत के लिए क्या मायने?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ईरान मिसाइल रेंज मानचित्र भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। यह देश की मिसाइल रक्षा प्रणालियों, जैसे S-400, और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीतियों पर चर्चा को और तेज कर सकता है।

हालांकि भारत सरकार की ओर से इस मानचित्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों के अनुसार ऐसी जानकारी वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को समझने में उपयोगी हो सकती है।

निष्कर्ष

IDF द्वारा जारी किया गया ईरान मिसाइल रेंज मानचित्र केवल एक सैन्य दस्तावेज नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। इजरायल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान की बढ़ती सैन्य क्षमता के प्रति आगाह करना और वैश्विक स्तर पर दबाव बनाना हो सकता है।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति को वैश्विक सुरक्षा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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