जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में हिजाब पहनने वाली बेटी भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। रामभद्राचार्य ने इस बयान को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए कहा कि भारत की संस्कृति और परंपरा के अनुरूप प्रधानमंत्री साड़ी पहनकर ही बनेगी।
“यह दिवास्वप्न है” – रामभद्राचार्य
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा,
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाया गया, हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाया गया। उन्हें और क्या चाहिए? यह दिवास्वप्न देख रहे हैं। अगर भारत में कोई महिला प्रधानमंत्री बनेगी, तो वह साड़ी पहनकर ही बनेगी।”
उन्होंने ओवैसी के बयान को भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत बताया।
ओवैसी ने क्या कहा था?
गौरतलब है कि असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि
“एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी भारत की प्रधानमंत्री बनेगी।”
उन्होंने इसे भारतीय संविधान की समावेशिता और समानता से जोड़ते हुए अपना सपना बताया था। ओवैसी ने यह भी कहा था कि भारत का संविधान हर नागरिक को प्रधानमंत्री बनने का अधिकार देता है, चाहे वह किसी भी समुदाय से हो।
पाकिस्तान के संविधान से की थी तुलना
अपने भाषण में ओवैसी ने पाकिस्तान के संविधान से तुलना करते हुए कहा था कि भारत का संविधान ज्यादा समावेशी है और यहां किसी भी धर्म की महिला सर्वोच्च पद तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा था,
“शायद मैं वह दिन देखने के लिए जीवित न रहूं, लेकिन ऐसा जरूर होगा।”
नगर निकाय चुनावों के बीच आया बयान
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और AIMIM सक्रिय प्रचार कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान मुस्लिम मतदाताओं को साधने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
पहले भी मिल चुका है मुस्लिम समुदाय को उच्च पद
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय को पहले ही देश के उच्च संवैधानिक पदों पर प्रतिनिधित्व मिल चुका है।
इंदिरा गांधी का भी किया गया जिक्र
रामभद्राचार्य समर्थकों ने यह भी याद दिलाया कि भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साड़ी पहनती थीं, और वे भारतीय परंपरा व संस्कृति की प्रतीक थीं।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देशभर में धार्मिक पहचान, संवैधानिक अधिकार और भारतीय संस्कृति को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
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कुछ दल ओवैसी के बयान को संविधान की भावना के अनुरूप बता रहे हैं,
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जबकि कई राजनीतिक और धार्मिक नेता इसे विभाजनकारी और भड़काऊ करार दे रहे हैं।
आगे और तेज हो सकती है बयानबाजी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है, खासकर चुनावी माहौल को देखते हुए।









