बिहार की राजनीति में एक बार फिर भारत रत्न सम्मान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग की है।
“समाजवादी आंदोलन का अनमोल रत्न” – केसी त्यागी
अपने पत्र में केसी त्यागी ने नीतीश कुमार को समाजवादी आंदोलन का ‘अनमोल रत्न’ बताया। उन्होंने लिखा कि नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक जीवन, जनहितैषी कार्यों और साफ-सुथरी छवि ने उन्हें इस सम्मान का पूर्ण हकदार बना दिया है।
त्यागी ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की मुख्यधारा में लाने के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की मजबूत नींव रखी है।
कानून-व्यवस्था, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का जिक्र
केसी त्यागी ने पत्र में उल्लेख किया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में
-
कानून-व्यवस्था की बहाली,
-
महिला सशक्तिकरण,
-
शिक्षा में सुधार,
-
और आधारभूत संरचना का विकास
जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व काम हुआ है।
उन्होंने लिखा कि इन सुधारों ने बिहार की छवि देशभर में बदली है।
एनडीए के अहम सहयोगी और लगातार चौथी बार सत्ता में
यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन के अहम सहयोगी हैं और बिहार में उनकी सरकार लगातार चौथी बार सत्ता में है।
जेडीयू नेताओं का मानना है कि नीतीश कुमार ने न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी समाजवादी विचारधारा को मजबूत किया है और जेपी आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाया है।
जेपी और लोहिया की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा
केसी त्यागी ने अपने पत्र में लिखा कि नीतीश कुमार ने जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए राजनीति में नैतिकता और जनसेवा को सर्वोपरि रखा।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन हमेशा जनहित और नैतिक मूल्यों पर आधारित रहा है।
बिहार की राजनीति में हलचल, विपक्ष का तंज
इस पत्र के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
जेडीयू कार्यकर्ताओं में उत्साह है, जबकि विपक्षी दल इसे “सत्ता के करीब रहने की कोशिश” बता रहे हैं।
राजद और कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक विपक्ष इसे एक राजनीतिक दांव के रूप में देख रहा है।
कर्पूरी ठाकुर का संदर्भ और राजनीतिक संदेश
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कई प्रमुख नेताओं को भारत रत्न दिया गया है, जिनमें कर्पूरी ठाकुर (मरणोपरांत) भी शामिल हैं, जिन्हें नीतीश कुमार अपना आदर्श मानते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मांग एनडीए गठबंधन की एकजुटता का संदेश भी देती है।
अब केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जाएगा।









