केदारनाथ धाम को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अपना 325वां रावल मिलने जा रहा है। वर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग (केदार लिंग) को उत्तराधिकारी घोषित किया है।
केदारनाथ धाम ऐतिहासिक घोषणा
महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित अपने मठ से जारी बयान में वर्तमान रावल ने कहा कि स्वास्थ्य कारणों से वे अब जिम्मेदारियां निभाने में असमर्थ हैं।
महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) को ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में नए रावल की विधिवत घोषणा होगी। इसी दिन धाम के कपाट खुलने की तिथि भी घोषित की जाएगी।
परंपरा और धार्मिक महत्व
केदारनाथ धाम:
• 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक
• पंचकेदार में सर्वोच्च स्थान
• सदियों से वीरशैव (लिंगायत) परंपरा के रावलों द्वारा संचालन
रावल मंदिर के मुख्य पुजारी होते हैं और पूजा-विधि, परंपरा और आध्यात्मिक जिम्मेदारियां निभाते हैं।
केदारनाथ धाम समारोह में भागीदारी
घोषणा समारोह में पारंपरिक हक-हकूकधारी गांवों के लोग शामिल होंगे:
• डंगवाड़ी
• भटवाड़ी
• चुनी-मंगोली
• किमाणा
• पचौली डुंगर सेमला
भक्तों के लिए महत्व
यह बदलाव केदारनाथ की आध्यात्मिक परंपरा में नया अध्याय जोड़ेगा।
नए रावल के नेतृत्व में:
• यात्रा व्यवस्था मजबूत होगी
• पूजा परंपरा सुचारु चलेगी
• श्रद्धालुओं में नई उत्सुकता बढ़ेगी







