पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने राष्ट्रीय असेंबली में अमेरिका पर अब तक का सबसे तीखा हमला करते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक हितों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और बाद में उसे “टॉयलेट पेपर से भी बदतर तरीके से फेंक दिया।”
यह बयान इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले के बाद आतंकवाद पर चल रही बहस के दौरान सामने आया।
“ये हमारी नहीं, महाशक्तियों की जंग थी”
आसिफ ने संसद में कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका की जंगों में शामिल होकर भारी कीमत चुकाई।
उन्होंने कहा:
- पाकिस्तान ने अमेरिका को हवाई क्षेत्र दिया
- अफगान युद्ध में जमीन उपलब्ध कराई
- रणनीतिक सहयोग किया
लेकिन इसके बदले देश को मिला:
- आतंकवाद
- आर्थिक संकट
- सामाजिक अस्थिरता
- कट्टरता में वृद्धि
9/11 के बाद गठजोड़ को बताया ‘गंभीर गलती’
रक्षा मंत्री ने खास तौर पर 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमेरिका के साथ गठजोड़ को बड़ी भूल बताया।
उन्होंने कहा कि 1999 के बाद अमेरिका के साथ दोबारा संबंध मजबूत करना पाकिस्तान की रणनीतिक गलती थी, जिसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम सामने आए।
पाकिस्तान ने अपनी गलतियां भी मानी
आसिफ ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान की अपनी नीतियों ने भी स्थिति को खराब किया।
उन्होंने कहा:
- तानाशाही दौर में गलत फैसले हुए
- आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियां अपनाई गईं
- देश ने गलतियों से सीख नहीं ली
अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों का जटिल इतिहास
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध दशकों से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।
मुख्य दौर:
- सोवियत-अफगान युद्ध (1979-89)
- वॉर ऑन टेरर (2001 के बाद)
- 2021 में अमेरिका का अफगानिस्तान से निकलना
अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियां बढ़ने से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है।
बयान के पीछे घरेलू राजनीति भी कारण?
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है।
संभावित कारण:
- पाकिस्तान का आर्थिक संकट
- बढ़ता आतंकवाद
- अमेरिका विरोधी भावना
- स्वतंत्र विदेश नीति की मांग
कुछ विशेषज्ञों ने इसे “आधा सच” बताते हुए कहा कि पाकिस्तान ने भी अमेरिकी सहयोग से रणनीतिक लाभ उठाए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचा हलचल
ख्वाजा आसिफ का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बन गया है। इससे पाकिस्तान की विदेश नीति और अमेरिका के साथ भविष्य के संबंधों पर नई बहस छिड़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह बयान केवल राजनीतिक बयानबाजी है या संबंधों में वास्तविक बदलाव का संकेत।
निष्कर्ष: क्या बदलेंगे रिश्ते?
यह बयान पाकिस्तान में बढ़ती अमेरिका-विरोधी भावना को दर्शाता है। हालांकि, दोनों देशों के रणनीतिक और सुरक्षा हित अभी भी जुड़े हुए हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बयान केवल राजनीतिक संदेश है या विदेश नीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।







