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26 लाख में 4 करोड़ की जमीन, तीन दिन में नौकरी: ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले की परत-दर-परत कहानी

BPC News National Desk
4 Min Read

दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व रेल मंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, दूसरी बेटी हेमा यादव सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।

अदालत ने इसे “एक संगठित आपराधिक साजिश” करार देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया सबूतों से यह स्पष्ट होता है कि रेलवे में नौकरी के बदले जमीनें हासिल की गईं।

क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला?

यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 तक यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआई के अनुसार, इस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीनें लिखवाई गईं, जो बाद में लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम ट्रांसफर की गईं।

नौकरी के बदले जमीन का खेल

जांच एजेंसी का दावा है कि नौकरी पाने वाले कई उम्मीदवारों को पहले सब्स्टीट्यूट नियुक्ति दी गई और फिर कुछ ही दिनों में उन्हें स्थायी कर दिया गया। इसी दौरान या उससे पहले जमीनों का सौदा कराया गया।

तीन दिन में नौकरी, जमीन तुरंत ट्रांसफर

चार्जशीट में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां नौकरी के तीन दिन के भीतर ही जमीन का ट्रांसफर कर दिया गया। जांच के अनुसार, कई उम्मीदवारों को बिना किसी परीक्षा या योग्यता प्रक्रिया के सीधे नौकरी दी गई।

26 लाख में 4 करोड़ की जमीन

सीबीआई की चार्जशीट में चौंकाने वाले उदाहरण सामने आए हैं।
एक मामले में करीब 4 करोड़ रुपये कीमत की जमीन मात्र 26 लाख रुपये में रजिस्टर्ड दिखाई गई। इसी तरह पटना, रांची और अन्य जगहों पर भी बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत पर जमीनें ट्रांसफर की गईं।

लालू परिवार की कंपनियों और ट्रस्ट तक पहुंची जमीन

जांच में यह भी सामने आया कि ये जमीनें बाद में लालू परिवार की कंपनियों या ट्रस्ट के नाम पर चली गईं या फिर गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर कर दी गईं।

कोर्ट ने क्या कहा?

विशेष न्यायाधीश ने आरोप तय करते हुए कहा कि

“प्रथम दृष्टया यह एक सुनियोजित आपराधिक साजिश प्रतीत होती है, जिसमें पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ पहुंचाया गया।”

अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) सहित कई धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।

कौन-कौन हैं आरोपी?

इस मामले में लालू परिवार के सदस्यों के अलावा:

  • पूर्व रेलवे अधिकारी

  • कई बिचौलिए

  • जमीन डीलर

  • और नौकरी पाने वाले उम्मीदवार

को भी आरोपी बनाया गया है। कुल 41 लोग इस केस में नामजद हैं।

लालू यादव की ओर से क्या कहा गया?

लालू प्रसाद यादव और उनके समर्थकों की ओर से पहले ही इसे “राजनीतिक साजिश” बताया जा रहा है। हालांकि, सीबीआई और ईडी दोनों एजेंसियां मामले में सक्रिय हैं और जांच जारी है।

अब आगे क्या होगा?

अब इस मामले में नियमित सुनवाई शुरू होगी। गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे और दस्तावेजी सबूत पेश किए जाएंगे। कोर्ट में यह तय होगा कि आरोप कितने मजबूत हैं और किसे क्या सजा मिलती है।

सरकारी नौकरियों पर उठते सवाल

यह घोटाला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सरकारी नौकरियों और सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग निजी फायदे के लिए कैसे किया गया। यह मामला देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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