हरियाणा के अंबाला की रहने वाली 25 वर्षीय मेडिकल छात्रा डॉ तन्वी की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है। देहरादून स्थित श्री गुरु राम राय (SGRR) मेडिकल कॉलेज में एमएस की पढ़ाई कर रही तन्वी का सपना एक सफल सर्जन बनने का था, जो अब अधूरा रह गया।
“पापा… अब सहन नहीं हो रहा” – आखिरी बातचीत
24 मार्च की रात, डॉ तन्वी ने अपने पिता से करीब एक घंटे तक बात की। बातचीत के दौरान वह बेहद परेशान और भावुक थीं।
उन्होंने कहा—
“पापा, अब सहन नहीं हो रहा… बहुत परेशान हो गई हूँ। अब यह रिकॉर्डिंग मैनेजमेंट को दिखानी ही पड़ेगी।”
पिता ने उन्हें समझाने की कोशिश की और तुरंत अंबाला से देहरादून के लिए रवाना हो गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
ऑडियो रिकॉर्डिंग ने खोले कई राज
मौत से पहले रिकॉर्ड की गई ऑडियो क्लिप में तन्वी और उनकी HOD के बीच बातचीत सामने आई है, जो मानसिक दबाव की ओर इशारा करती है।
संवाद के कुछ अंश:
तन्वी: “मैम, आप बताओ मैं किस-किस को खुश करूँ और कैसे?”
HOD: “मैं तुम्हें टारगेट नहीं कर रही… तुमसे सब नाखुश हैं।”
तन्वी: “मैं इंट्रोवर्ट हूँ मैम… ज्यादा लोगों से बात नहीं कर पाती।”
यह बातचीत मेडिकल छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
सड़क किनारे मिली कार, अंदर मिली बेसुध हालत
जब पिता देहरादून पहुंचे तो कॉलेज परिसर में तन्वी की कार नहीं मिली। बाद में उनकी कार एक पेट्रोल पंप के पास खड़ी मिली।
कार के अंदर:
तन्वी ड्राइविंग सीट पर बेसुध मिलीं
हाथ में कैनुला लगा था
पास में एक खाली बोतल पाई गई
शीशा तोड़कर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
टॉपर छात्रा, जुलाई में थे फाइनल एग्जाम
डॉ तन्वी बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थीं। वह एमएस की पढ़ाई कर रही थीं और इसी साल जुलाई में उनके फाइनल एग्जाम होने वाले थे।
उनकी मां भी देहरादून में उनके साथ रह रही थीं, ताकि पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
HOD पर FIR दर्ज, गंभीर आरोप
परिजनों की शिकायत के आधार पर देहरादून पुलिस ने HOD डॉ प्रियंका गुप्ता के खिलाफ FIR दर्ज की है।
परिवार ने आरोप लगाया है कि:
लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी
नंबर काटने और फेल करने की धमकी दी गई
अपमानजनक व्यवहार किया गया
यह मामला अब जांच के दायरे में है।
अंतिम विदाई में नम हुई हर आंख
अंबाला में जब तन्वी का अंतिम संस्कार हुआ, तो हर कोई भावुक हो गया। एक होनहार डॉक्टर, एक बेटी और एक सपना—सब कुछ खत्म हो गया।
पिता ने भारी मन से अपनी बेटी को मुखाग्नि दी।
बड़ा सवाल: क्या सिस्टम जिम्मेदार है?
यह मामला सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि पूरे मेडिकल शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करता है:
क्या मेडिकल छात्रों पर अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है?
क्या संस्थानों में शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है?
क्या मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज किया जा रहा है?
निष्कर्ष
डॉ तन्वी की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं हम अपने युवाओं का मानसिक संतुलन तो नहीं खो रहे।
परिवार और समाज की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई और छात्र इस तरह का कदम न उठाए।









