विजयनगर थाना क्षेत्र की प्रताप विहार स्थित कुणाल रेजिडेंसी सोसायटी में सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। सुबह 8:30 बजे एक लिफ्ट अचानक खराब होकर चौथी मंजिल से सीधे बेसमेंट में जा गिरी, जिसमें सवार चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद सोसायटी में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुणाल रेजिडेंसी लिफ्ट में दो महिलाएँ और दो पुरुष सवार थे। जैसे ही लिफ्ट नीचे की ओर बढ़ी, अचानक केबल टूटने या ब्रेक फेल होने के कारण वह तेज रफ्तार से गिर गई। बेसमेंट में पहुँचते ही जोरदार धमाका हुआ और दरवाजा अपने आप खुल गया।
रहवासियों ने चीख-पुकार सुनकर तुरंत मौके पर पहुँचकर घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल ले जाया गया।
घायल कौन-कौन हैं?
पीड़ितों की पहचान:
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रेखा शर्मा (45 वर्ष)
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प्रिया गुप्ता (32 वर्ष)
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राजेश कुमार (40 वर्ष)
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मोहित त्यागी (27 वर्ष)
चारों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों की कमर और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन हालत स्थिर है।
“मेंटेनेंस नाम की कोई चीज़ नहीं होती”—निवासी
हादसे के बाद सोसायटी के निवासियों में भारी गुस्सा फैल गया। कई लोगों ने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से लिफ्ट में गंभीर खामियाँ थीं, लेकिन बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया।
एक निवासी ने बताया:
“पिछले तीन महीनों में लिफ्ट 15–20 बार खराब हुई है। लोग कई बार अंदर फँस चुके हैं। शिकायत करने पर केवल बहाने दिए जाते थे।”
सूत्रों के अनुसार लिफ्ट की अंतिम सर्विसिंग जुलाई 2024 में हुई थी, उसके बाद केवल कागजी औपचारिकताएँ पूरी की जाती रहीं।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने शुरू की जाँच
घटना की जानकारी मिलते ही:
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विजयनगर थाना पुलिस
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फॉरेंसिक टीम
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विद्युत सुरक्षा विभाग
मौके पर पहुँचे और लिफ्ट को सील कर दिया गया।
थाना प्रभारी के अनुसार:
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मेंटेनेंस एजेंसी
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सोसायटी आरडब्ल्यूए सचिव
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बिल्डर
के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया जा रहा है।
निवासियों की माँग
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दोषियों पर IPC की संगीन धाराओं में FIR
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सभी लिफ्टों का थर्ड-पार्टी सेफ्टी ऑडिट
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घायलों का मुफ्त इलाज व मुआवजा
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बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी की जवाबदेही
फिलहाल सोसायटी की दोनों लिफ्टें बंद कर दी गई हैं और लोग सीढ़ियों का उपयोग कर रहे हैं।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह हादसा कुणाल रेजिडेंसी हाई-राइज सोसायटीज़ में लिफ्ट सुरक्षा, रखरखाव और बिल्डर–मालिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही तकनीकी कारण और वास्तविक दोषी सामने आएँगे।










