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प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन पर ठेकेदारों का तालाबंदी विरोध, देहरादून कार्यालय पर जड़ा ताला, भुगतान की मांग

BPC News National Desk
4 Min Read

उत्तराखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन को लेकर ठेकेदारों में गहरा असंतोष देखने को मिला। देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने इंदर रोड स्थित जल जीवन मिशन कार्यालय पर तालाबंदी कर धरना-प्रदर्शन किया और दो वर्षों से लंबित भुगतान की तत्काल मांग उठाई।

ठेकेदारों ने मिशन डायरेक्टर (आईएएस) विशाल मिश्रा को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि बिना भुगतान के काम कराना अब संभव नहीं है।

दो साल से भुगतान नहीं, आर्थिक संकट में ठेकेदार

एसोसिएशन का कहना है कि ठेकेदारों ने हर घर नल योजना को जमीन पर उतारने के लिए अपनी क्षमता से अधिक तन, मन और धन लगाया, लेकिन भुगतान लगातार टलता रहा।
पहले कहा गया कि जियो-टैगिंग पूरी होने पर भुगतान होगा, फिर KML फाइल बनने पर, और अब यूनिक आईडी (मैपिंग पूर्ण होने) के बाद भुगतान की बात कही जा रही है।

इस प्रक्रिया में उलझाकर ठेकेदारों को दो वर्षों से एक भी भुगतान नहीं मिला, जिससे कई ठेकेदार दिवालियापन की कगार पर पहुंच चुके हैं।

रखरखाव के लिए मजबूर, जनता ने उखाड़े कनेक्शन

ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि योजनाओं की तय समय-सीमा खत्म होने के बाद भी उनसे रखरखाव और संचालन कराया जा रहा है।
कई इलाकों में जलापूर्ति शुरू न होने से स्थानीय लोगों ने कनेक्शन उखाड़ दिए, फिर भी ठेकेदारों से व्यवस्था संभालने की अपेक्षा की जा रही है।

फाइनल बिल और FCR अटकी, प्रक्रिया में उलझाया

एसोसिएशन ने बताया कि

  • फाइनल बिल,

  • एक्स्ट्रा आइटम,

  • वेरिएशन ऑर्डर
    तैयार नहीं किए जा रहे, जिससे FCR स्वीकृति अटकी हुई है।

ठेकेदारों को जांच, आईडी निर्माण और तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझाकर रखा जा रहा है, जबकि भुगतान पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा।

अन्य राज्यों में भुगतान, उत्तराखंड में क्यों नहीं?

ठेकेदारों ने सवाल उठाया कि

  • उत्तर प्रदेश में हाल ही में धन आवंटन किया गया है,

  • केरल में 100% भुगतान वैकल्पिक योजना से हो चुका है,
    तो उत्तराखंड में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?

उन्होंने कहा कि कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए गए हैं, जिनकी थर्ड पार्टी एजेंसियों द्वारा जांच भी हो चुकी है।

अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

ठेकेदारों ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि

“अगर गुणवत्ता में कमी है तो सिर्फ ठेकेदारों पर कार्रवाई क्यों?
पर्यवेक्षण करने वाले अभियंता कहां थे?
क्या उनकी तनख्वाह रोकी गई या विभागीय कार्रवाई हुई?”

उन्होंने यह भी पूछा कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो अधिकारियों के खिलाफ FIR क्यों नहीं दर्ज की गई।

ब्लैकलिस्टिंग और जब्ती पर रोक की मांग

एसोसिएशन ने मांग की कि

  • ब्लैकलिस्टिंग,

  • जमा धनराशि जब्ती,

  • और दमनात्मक कार्रवाई
    पर तत्काल रोक लगाई जाए।

साथ ही श्रमिकों और ठेकेदार परिवारों की आर्थिक व सामाजिक समस्याओं को संवेदनशीलता से देखने की अपील की गई।

“भुगतान नहीं तो काम नहीं” – ठेकेदारों की चेतावनी

धरने में जेपी अग्रवाल, ध्रुव जोशी, यशपाल चौहान, सुनील गुप्ता, सचिन मित्तल, अंकित सालार, जगजीत सिंह सहित कई पीड़ित ठेकेदार शामिल रहे।

ठेकेदारों ने साफ चेतावनी दी कि

“यदि बकाया भुगतान नहीं हुआ तो आगे कोई कार्य नहीं किया जाएगा।
योजनाओं में देरी या नुकसान की पूरी जिम्मेदारी शासन और विभाग की होगी।”

राष्ट्रीय योजना पर संकट के संकेत

यह विरोध प्रदर्शन जल जीवन मिशन जैसी राष्ट्रीय महत्व की योजना में भुगतान व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो योजना के उद्देश्य और समय-सीमा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

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