गाजियाबाद: नगर निगम द्वारा संपत्ति कर (हाउस टैक्स) में लगभग 300% वृद्धि के विरोध में महानगर उद्योग व्यापार मंडल (MGITB) ने सोमवार को उडुपी कृष्णा रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता आयोजित की। संगठन ने इसे जनविरोधी और अव्यवहारिक बताते हुए तत्काल वापसी की मांग की है।
मंडल ने स्पष्ट किया कि वे शहर के विकास के पक्षधर हैं, लेकिन इतनी बड़ी वृद्धि आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए असहनीय बोझ साबित हो रही है।
प्रमुख बिंदु और मांगें
-
विकास के पक्ष में, लेकिन वृद्धि अस्वीकार्य
मंडल हाउस टैक्स वृद्धि के सिद्धांत का समर्थन करता है, लेकिन वर्तमान 300% वृद्धि जनहित और व्यवहारिक स्तर से बाहर है। मांग है कि इसे 10-20% तक सीमित किया जाए। -
जनादेश का सम्मान आवश्यक
जनप्रतिनिधियों को जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए वृद्धि को तर्कसंगत स्तर पर सीमित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए। -
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और विपक्ष की निष्क्रियता
इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद, सत्ताधारी और विपक्षी दलों की चुप्पी चिंताजनक है। -
लोकतांत्रिक प्रक्रिया और बोर्ड निर्णय
यदि नगर निगम बोर्ड द्वारा महापौर एवं पार्षदों के निर्णय के बावजूद वृद्धि लागू रहती है, तो यह लोकतंत्र और जनप्रतिनिधियों की गरिमा पर सवाल उठाता है। -
नगर निगम संरचना और प्रशासनिक जवाबदेही
मंडल ने नगर आयुक्त के स्थानांतरण और हाउस टैक्स निर्धारण में शामिल अधिकारियों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।
अल्टीमेटम और आगे की कार्रवाई
-
संगठन ने प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है।
-
यदि वृद्धि वापस नहीं ली गई, तो जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
-
इसके बाद भी परिणाम नहीं आने पर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
आभार और समर्थन
मंडल ने गाजियाबाद नगर निगम पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन को नागरिक हित में मुखर होकर आवाज उठाने के लिए धन्यवाद दिया।
महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने दोहराया कि वह शहर के विकास और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।








