एक समय भारतीय मोबाइल बाजार में Micromax का नाम हर घर में जाना जाता था। कंपनी ने कम कीमत में शानदार फीचर्स देकर बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स को चुनौती दी और 2014-15 तक भारत का नंबर-1 मोबाइल ब्रांड बन गई।
उस समय कंपनी का मार्केट शेयर लगभग 22% तक पहुंच गया था और यह दुनिया के शीर्ष मोबाइल ब्रांड्स में शामिल हो चुकी थी।
राहुल शर्मा का सपना और शुरुआत
Rahul Sharma ने एक साधारण कारोबारी के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। उन्होंने कंप्यूटर पार्ट्स से शुरुआत कर मोबाइल इंडस्ट्री में कदम रखा।
2008 में कंपनी ने अपना लोकप्रिय मॉडल X1i लॉन्च किया, जिसकी लंबी बैटरी लाइफ ने बाजार में तहलका मचा दिया। इसके बाद Canvas सीरीज ने माइक्रोमैक्स को तेजी से लोकप्रिय बना दिया।
गिरावट की शुरुआत: 2016 का बड़ा बदलाव
2016 के बाद बाजार का पूरा समीकरण बदल गया, खासकर Reliance Jio के मुफ्त 4G डेटा ऑफर के बाद।
चीनी ब्रांड्स जैसे Xiaomi, Oppo और Vivo बेहतर स्पेसिफिकेशन वाले सस्ते 4G स्मार्टफोन लेकर आए।
माइक्रोमैक्स की सबसे बड़ी कमजोरी रही R&D में कम निवेश। नई टेक्नोलॉजी अपनाने में देरी के कारण कंपनी का मार्केट शेयर तेजी से गिर गया।
मैन्युफैक्चरिंग के जरिए वापसी की कोशिश
गिरावट के बाद कंपनी ने रणनीति बदली और अपने मैन्युफैक्चरिंग आर्म Bhagwati Products Limited पर ध्यान केंद्रित किया।
PLI स्कीम्स का फायदा उठाकर कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से विस्तार किया। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी का कारोबार कुछ ही वर्षों में कई गुना बढ़ गया है।
नई साझेदारियां और भविष्य की रणनीति
माइक्रोमैक्स अब ODM मॉडल पर काम कर रही है और कई वैश्विक कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग कर रही है। चीन की Huaqin Technology के साथ जॉइंट वेंचर ने इसे और मजबूती दी है।
हालांकि कंपनी ब्रांडेड स्मार्टफोन सेगमेंट में वापसी की कोशिश भी कर रही है, लेकिन फिलहाल उसका मुख्य फोकस मैन्युफैक्चरिंग है।
माइक्रोमैक्स की कहानी से क्या सीख मिलती है
माइक्रोमैक्स की यात्रा एक बड़ा बिजनेस सबक देती है—
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बाजार तेजी से बदलता है
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टेक्नोलॉजी में निवेश जरूरी है
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ग्राहक की जरूरतों के साथ कदम मिलाना जरूरी है
राहुल शर्मा की रणनीति बदलाव यह दिखाती है कि गिरावट के बाद भी सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो कमबैक संभव है।








