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एमआईटी-डब्ल्यूपीयू एचआर कॉन्क्लेव 2026: 20+ संगठनों ने मिलकर युवाओं की वर्क-रेडीनेस पर दिया जोर

BPC News National Desk
4 Min Read

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU), पुणे ने एचआर कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन किया, जिसमें उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों ने मिलकर अगली पीढ़ी के कार्यबल को तैयार करने पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का उद्देश्य छात्रों को बदलते कार्यस्थल की चुनौतियों के लिए तैयार करना था, ताकि वे केवल नौकरी हासिल ही न करें बल्कि लंबे समय तक सफल और संतुष्ट करियर बना सकें।

कॉन्क्लेव का मुख्य विषय

इस वर्ष कॉन्क्लेव की थीम रही:

“नई पीढ़ी को हुनरमंद बनाना: उम्मीदें बनाम सच्चाई”

(New Generation Talent Readiness: Expectations vs Reality)

इस विषय के अंतर्गत दो प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा हुई:

  • प्लग-एंड-प्ले या ट्रेन-एंड-ट्रांसफॉर्म?
    एचआर की नजर में नई पीढ़ी का टैलेंट

  • एम्प्लॉयबिलिटी बनाम वर्क रेडीनेस
    शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई

20+ प्रमुख संगठनों की भागीदारी

कॉन्क्लेव में देश-विदेश के 20 से अधिक संगठनों के एचआर लीडर्स शामिल हुए, जिनमें प्रमुख नाम हैं:

  • इन्फोसिस बीपीएम

  • नोवार्टिस

  • कल्याणी ग्रुप

  • एसकेएफ इंडिया

  • यूनाइटेड एयरलाइंस

  • विप्रो इंजीनियरिंग

  • मेट्रो ग्लोबल सॉल्यूशंस

  • बीएनवाई मेलॉन

  • पीडब्ल्यूसी

  • इनोमैटिक्स रिसर्च लैब्स

इन संगठनों ने युवाओं की रोजगार क्षमता और कार्यस्थल कौशल पर अपने अनुभव साझा किए।

विशेषज्ञों की प्रमुख राय

समग्र विकास पर जोर

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के वाइस-चांसलर डॉ. आर. एम. चिटनिस ने कहा:

“कर्मचारियों की सफलता केवल प्रोफेशनल नहीं बल्कि मानसिक, सामाजिक और वित्तीय संतुलन पर निर्भर करती है। खुश कर्मचारी ही संगठन को मजबूत बनाते हैं।”

मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत

नोवार्टिस के एडीएचआर विक्रम कुलकर्णी ने कहा:

“बेहतर प्रदर्शन के लिए संतुलित माहौल और मानसिक सुकून जरूरी है। लीडर्स को कर्मचारियों की खुशी पर ध्यान देना चाहिए।”

कोविड के बाद मानसिक जागरूकता

एसकेएफ इंडिया के वीपी-एचआर जैकब वर्गीस ने कहा:

“कोविड के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा होना सकारात्मक बदलाव है। सीमाएं तय करना और ‘ना’ कहना सीखना जरूरी है।”

कार्य-जीवन संतुलन पर चर्चा

मुंबई मेट्रो वन के एलएंडडी हेड निखिल भोजवानी ने कहा:

“कामकाजी माता-पिता के लिए संगठनों को काउंसलिंग और परिवार-समर्थक नीतियां लागू करनी चाहिए।”

भविष्य के कार्यस्थल पर चर्चा

कॉन्क्लेव में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार हुआ:

  • एआई-सक्षम कार्यस्थल

  • बदलते हायरिंग ट्रेंड्स

  • परिसर प्लेसमेंट की उम्मीदें

  • शिक्षा-उद्योग अंतर को कम करना

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि छात्रों को नौकरी-तैयार बनाने के लिए:

  • इंटर्नशिप

  • लाइव प्रोजेक्ट्स

  • अप्रेंटिसशिप

  • मेंटरशिप

को शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।

शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत सेतु

कॉन्क्लेव का समापन इस सहमति के साथ हुआ कि:

👉 शिक्षा और उद्योग मिलकर युवाओं को डिग्री के साथ वर्क-रेडी स्किल्स प्रदान करेंगे।

यह पहल भारत की अगली पीढ़ी के कार्यबल को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

निष्कर्ष

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू और एचआर शेपर्स ग्रुप के सहयोग से आयोजित यह कॉन्क्लेव शिक्षा और उद्योग जगत के बीच संवाद और सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें भारत के युवाओं को वैश्विक कार्यस्थल के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेंगी।

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