दैनिक भास्कर के पत्रकार आकाश गर्ग पर हुए जानलेवा हमले को 24 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इस घटना ने एक बार फिर मीडिया कर्मियों की सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
दिल्ली गेट इलाके में हुई इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों में आक्रोश है। सीसीटीवी फुटेज में हमलावर साफ नजर आने के बावजूद पुलिस की सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या थी पूरी घटना?
जानकारी के अनुसार, आकाश गर्ग अपने घर के बाहर टहल रहे थे, तभी दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। पत्रकार होने के नाते उन्होंने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
लेकिन कुछ देर बाद एक पक्ष के 10 से अधिक युवक लाठी-डंडों और लोहे के हथियारों के साथ पहुंचे और आकाश गर्ग पर हमला कर दिया। हमलावरों ने उन्हें घेरकर बेरहमी से पीटा और हवाई फायरिंग भी की।
गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती
हमले में आकाश गर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके शरीर में कई फ्रैक्चर बताए जा रहे हैं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पूरी घटना पास के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
घटना के करीब एक घंटे बाद पुलिस के मौके पर पहुंचने की बात सामने आई है, जिससे पुलिस की प्रतिक्रिया समय पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पत्रकार समुदाय का कहना है कि जब हमलावरों की पहचान सीसीटीवी में साफ है, तो गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है।
बढ़ता आक्रोश, कार्रवाई की मांग
स्थानीय पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यह मामला आम नागरिक का होता, तो शायद अब तक कार्रवाई हो चुकी होती।
पत्रकार सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा
यह घटना पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। देशभर में पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, खासकर जब वे संवेदनशील मामलों में हस्तक्षेप करते हैं या रिपोर्टिंग करते हैं।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
मीडिया संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
गाजियाबाद जैसे शहर में इस तरह की घटनाएं कानून व्यवस्था और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं।
पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग
पत्रकारों का कहना है कि पुलिस को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। देरी से अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और पीड़ित का विश्वास कमजोर होता है।
अपडेट
घटना के 24 घंटे बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। पत्रकार समुदाय लगातार पुलिस से जवाब मांग रहा है और जल्द न्याय की उम्मीद कर रहा है।








